राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
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देश के सबसे बड़े आयुध भंडार में लगी आग की झुलस कोसली के नया गांव में भी पहुंची। शुक्रवार शाम डीएससी सतीश का पार्थिव शव आने के बाद राजकीय सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया गया। शहीद सतीश की अंत्येष्टि में आसपास के गांव के सैकड़ों लोग तो थे ही लेकिन उनके परिवार के दिल का मर्म सबसे जुदा था। एक तरफ शहादत पर गर्व लेकिन साथ ही अनाथ होने का दर्द। नेशनल प्रतियोगिता में अपना सिक्का जमा चुकीं सतीश की दोनों बेटियां भी पिता की शहादत पर मौजूद थीं।
सतीश वर्ष 2014 में सेना से सेवानिवृत्त होकर राष्ट्रीय सुरक्षा कौर में वर्ष 2015 में भर्ती हो गया था और इस समय वह महाराष्ट्र के पुलगांव के आयुध भंडार में अपनी सेवा दे रहा था। गांव के पूर्व सरपंच अभय सिंह ने बताया कि वह मार्च में छुट्टी पर आया था और एक माह कि छुट्टी पूरी होने के बाद अप्रैल माह में अपनी ड्यूटी पर गया था।
उन्होंने बताया कि सतीश के दो लड़कियां हैं और दोनों लड़कियां नेशनल खिलाड़ी हैं। पिछले वर्ष उन्होंने नेशनल खेलों में कबड्डी व कुश्ती में स्वर्ण पदक हासिल किया था। उनका एक सात साल का छोटा भाई है। गांव के लोगों का कहना है कि सतीश एक मिलनसार व अपने कर्तव्य के प्रति सजग रहने वाला इंसान था। उनके अंतिम संस्कार में शहीद के साथ आए सूबेदार महाबीर ने पुष्प चक्र अर्पित कर सलामी दी। वहीं हरियाणा पुलिस के नाहड़ चौकी प्रभारी बिरेन्द्र के नेतृत्व में पुलिस के जवानों ने मातमी धुन के साथ शस्त्र सलामी दी। प्रशासन कि ओर से कोसली के नायब तहसीलदार विजय सिंह ने शहीद को पुष्प अर्पित किए।
अंतिम संस्कार पर ये रहे मौजूद
सतीश के अन्तिम संस्कार पर जिला उपप्रमुख जगफूल यादव, भाजपा के नेता सरदार सिंह भाला, कांग्रेस के एससी सैल के प्रदेश उपाध्यक्ष ओमप्रकाश डाबला, नाहड़ कालेज के प्राचार्य डॉ. सूर्यपाल, सतीश ठेकेदार, अभय सरपंच ,प्रेस क्लब के प्रधान जगदीश व पूर्व प्रधान सत्यनारायण भारद्वाज ,देवेंद्र, मनफूल, रामबेहर, सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।