भिवाड़ी। राजस्थान के भिवाड़ी स्थित खुशखेड़ा-कारौली औद्योगिक क्षेत्र में 16 फरवरी को अवैध पटाखा फैक्टरी ब्लास्ट की जांच करने के लिए वीरवार को विजिलेंस की टीम। इसका मुख्य कारण चार पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया जाना बताया जा रहा है। अब विजिलेंस इन पुलिसकर्मियों की संभावित भूमिका की गहन जांच करेगी।
घटनाक्रम के बीच जयपुर रेंज के आईजी राघवेंद्र सुहास पिछले तीन दिनों से भिवाड़ी में डेरा डाले हुए हैं और खुद मामले की निगरानी कर रहे हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आईजी ने भिवाड़ी की डिस्ट्रिक्ट स्पेशल टीम को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है।
जांच में यह जानकारी सामने आई है कि फैक्टरी संचालक हेमंत कुमार का भाई हेड कॉन्सेटबल योगेश कुमार शर्मा और डीएसटी प्रभारी मुकेश वर्मा जो टपूकड़ा थानाधिकारी भी थे, एक ही फ्लैट में रहते थे। कथित तौर पर यह फ्लैट आन रिकार्ड फैक्टरी मालिक की पत्नी के नाम पर था।
आईजी ने डीएसटी प्रभारी मुकेश वर्मा सहित हेड कॉन्स्टेबल योगेश कुमार शर्मा, कॉन्स्टेबल दिनेश कुमार और कॉन्स्टेबल जगपाल को लाइन हाजिर कर दिया है। साथ ही मुकेश वर्मा से टपूकड़ा थाना प्रभारी का कार्यभार भी वापस ले लिया गया है। उनकी जगह संजय मीणा को नया टपूकड़ा थानाधिकारी नियुक्त किया गया है।
विजिलेंस टीम अब यह जांच करेगी कि फैक्ट्री के संचालन और सुरक्षा मानकों में किसी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई। यह भी देखा जाएगा कि क्या स्थानीय स्तर पर किसी अधिकारी ने अनियमितताओं को नजरअंदाज किया।
धमाके में 7 लोगों की हुई थी मौत
16 फरवरी को हादसे में 7 मजदूरों की जलकर मौत हो गई थी। वहीं, 2 लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे, जिन्हें दिल्ली रेफर किया गया। प्रशासन ने अवैध फैक्टरी को सील कर दिया है। जांच में यह भी पता चला है कि पास ही एक और अवैध पटाखा फैक्टरी और गोदाम भी इसी मालिक से जुड़ा था, जहां से मशीनें और बड़ी मात्रा में पटाखे बरामद किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों को 3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। पुलिस ने फैक्टरी मालिक, मैनेजर और अन्य आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।