रेवाड़ी। दो बच्चों की मां एसपी संगीता कालिया का कहना है कि जिले में लॉ एंड ऑर्डर मेनटेन करने की उनकी जिम्मेदारी है।
ऑन ड्यूटी बेहद सख्त हूं लेकिन घर पहुंचते ही सिर्फ मां रह जाती हैं। वे कहती हैं कि मां तो मां ही होती है। बच्चों को भी सिर्फ मां ही चाहिए।
मातृ दिवस पर एसपी ने अमर उजाला से बतौर पुलिस अधिकारी अपनी जिम्मेदारी और मातृत्व के बीच सामंजस्य बैठाने के अनुभव साझा किए। उनके अनुसार आप जिले की एसपी हैं, कोई और वर्किंग लेडी या फिर घरेलू महिला। सबसे पहले आप मां ही होती हैं। हालांकि माता-पिता दोनों वर्किंग पर्सन होने की स्थिति में बच्चे भी इसी माहौल में एडजस्ट हो जाते हैं। उनका कहना है कि सोचो तो पहाड़ तोड़ना भी मुमकिन है। न सोचो तो कुछ नहीं कर सकते। रास्ता खोजो तो मंजिलें भी मिल ही जाती हैं। कोशिश रहती है कि सप्ताहांत पर पूरा समय दूं। इसके अलावा रात में भी पूरा टाइम बच्चों और परिवार के साथ रहती हूं। हालांकि 24*7 जॉब के चलते समय कम दे पाने की कसक तो रहती है। यह सेवा का रास्ता भी आखिर हमने ही तो चुना है। कभी-कभी तो दिन में काम और रात में बच्चों के चलते दो-दो दिन तक नींद पूरी नहीं होती। परिवार के बारे में एसपी संगीता कालिया बताती हैं कि उनका बेटा विवान अब पढ़ने के लिए स्कूल जाने लगा है। उसके अंदर मैं वाली बात नहीं आने दूंगी। जरूरी है कि बच्चों को शुरूआत से ही अच्छा इंसान बनने की सीख दी जाए। पॉजिटिव बातें बताई जाएं। बड़ों की इज्जत करना सिखाया जाए। घर से ही दूसरों को सम्मान देने की आदत डालना बेहद जरूरी है।
जिम्मेदारी नई नहीं, पुराना अनुभव है
पुरानी यादें साझा कर एसपी संगीता कालिया बताती हैं कि परिवार की पृष्ठभूमि बेहद अच्छी नहीं थी। उनकी हायर एजूकेशन के लिए भी कोई खास व्यवस्था नहीं थी। पिता के एक शब्द कि एसपी पुलिस में ऊंचा अधिकारी होता है, ने उनको मोटिवेशन दिया। इसके बाद उन्होंने संघर्ष कर हायर एजूकेशन की और एसपी तक पहुंची। भाई-बहनों में बड़ी होने के चलते जिम्मेदारी शुरूआत से उनके कंधों पर थीं। अपने छोटे भाइयों की हायर एजूकेशन भी उन्होंने ही करवाई है।
कैंप आफिस से की मानीटरिंग
एसपी संगीता कालिया को कुछ ही दिन पहले दूसरी बार मां बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। पति विवेक कालिया एचसीएस, चार साल का बेटा विवान और चंद रोज पहले जन्मी बेटी विहाना। मां बनने की खुशी के साथ ही जिले की एसपी होने की जिम्मेदारी कुछ ऐसी कि प्रेग्नेंसी के दौरान भी ऑनड्यूटी रहीं। ऑफिस जाने में कुछ दिक्कत दिखी तो कैंप ऑफिस से ही जिले की मॉनीटरिंग की और अधिकारियों को जरूरी दिशा निर्देश भी दिए। डिलीवरी के दिन ही छुट्टी ली और मां बनने के बाद महज 40 दिन की छुट्टी ली और एक बार फिर ऑन ड्यूटी हैं।