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जिला के गांव हालुहेड़ा के समीप एक प्राइवेट स्कूल की बस अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे के बाद बस में सवार करीब दो दर्जन विद्यार्थियों में हड़कंप मच गया। आसपास के लोगों ने बच्चों को बस से बाहर निकालकर उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया, जहां से उपचार के बाद बच्चों को घर भेज दिया गया। हादसे में चार से अधिक बच्चों को चोट आई हैं। बताया जा रहा है कि दुर्घटना के समय स्कूल बस का स्टेयरिंग फेल हो गया, जिसके चलते बस पलट गई। हादसे के वक्त बस की स्पीड तेज नहीं थी, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। दूसरी ओर बढ़ती ठंड से मासूम बच्चों को ठिठुरते हुए स्कूल पहुंचना पड़ रहा हैं, जिससे अभिभावकों में रोष है।
जानकारी के अनुसार जाटूसाना क्षेत्र के एक प्राइवेट स्कूल की बस शनिवार को छुट्टी होने के बाद बच्चों को घर छोड़ने के लिए निकली थी। इसी दौरान हालुहेड़ा के पास बस अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। पास के ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और स्कूल बस के भीतर फंसे विद्यार्थियों को बाहर निकाला। पांच बच्चों को मामूली चोटें भी आई हैं। सूचना के बाद पुलिस व स्कूल प्रबंधन में हड़कंप मच गया। लेकिन किसी तरह की कोई शिकायत नहीं मिलने पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
सर्दी में ठिठुरते बच्चे जा रहे स्कूल
धुंध व शीतलहर के चलते जिला में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। ऐसे में प्राईमरी स्कूल के बच्चों को भी कड़ाके की ठंड में ही स्कूल जाना पड़ रहा है। अधिकांश प्राईमरी स्कूलों की मार्निंग शिफ्ट 7 बजे से 8 बजे तक ।शुरू होती है। समय से स्कूल पहुंचने के लिए बच्चों को सुबह 6 बजे उठना पड़ता है। तेज सर्दी में स्कूल जाते बच्चे फ्लू और निमोनिया की चपेट में आने लगे हैं।
अभिभावकों ने की स्कूलों की छुट्टियां करने की मांग
कड़ाके की ठंड के बावजूद भी मासूम बच्चों को सुबह ठिठुरते हुए स्कूल जाना पड़ता है। बच्चे बीमार होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों ने प्रशासन से स्कूलों की छुट्टियों करने की मांग की है। अभिभावकों ने उपायुक्त को शिकायत पत्र भी दिया है।
कोहरे से बचने के लिए स्कूली बसों में नहीं पर्याप्त उपकरण
19 दिसंबर को सामाजिक संगठनों के लोगों की ओर से स्कूल बसों में कोहरे से बचाव के लिए पर्याप्त उपकरण नहीं होने की शिकायत डीसी को दी गई थी। शिकायत में कहा गया था कि स्कूल बसों में फॉग लाइट नही है, जिससे दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। इसके अलावा बच्चों को बसों में चालक वाली सीट पर बैठाया जाता है। ऐसे में हादसे के समय बचना मुश्किल रहता है।