रेवाड़ी। पंचायती जमीनों पर वर्ष 2004 या इससे पहले बनाए गए मकानों पर मालिकाना हक प्राप्त करने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से शुरू की गई योजना की समय सीमा 16 जनवरी को समाप्त होगी।
इस अवधि तक जिन लोगों ने पंचायत की शामलात भूमि पर बने अपने अवैध निर्माण को नियमित कराने के लिए आवेदन नहीं किया है उनके खिलाफ आने वाले समय में मकान तोड़ने और कब्जा हटाने की सख्त कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। अधिकतम 500 वर्ग गज तक की जमीन को ही संबंधित व्यक्ति के नाम कलेक्टर रेट के आधार पर नियमित करने का निर्णय लिया गया है।
शर्त यह है कि कुल घेरी का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा निर्मित होना चाहिए और शेष खुला एरिया उसी परिसर का हिस्सा हो। रेवाड़ी जिले में अब तक विभिन्न गांवों से 158 आवेदन विभाग को प्राप्त हो चुके हैं। विभागीय प्रक्रिया के तहत प्राप्त आवेदनों की छंटनी के बाद 11 मामलों को कार्रवाई के लिए भेजा गया था जिनमें से 3 आवेदनों को प्रदेश सरकार की ओर से अंतिम मंजूरी भी मिल चुकी है।
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जमीन से जुड़े यह सबूत करने होंगे जमा
सरकार की नीति के अनुसार जिस व्यक्ति का 31 मार्च 2004 से पहले पंचायत भूमि पर मकान बना है उसे उस भूमि की कीमत वर्ष 2004 के कलेक्टर रेट के डेढ़ गुना के बराबर राशि ग्राम पंचायत को अदा करनी होगी। यदि 2004 का कलेक्टर रेट उपलब्ध नहीं है तो उसके बाद के उपलब्ध वर्षों के रेट के आधार पर गणना की जाएगी। आवेदन के साथ जमाबंदी, खसरा गिरदावरी, मकान का साइट प्लान (कवर्ड और अन कवर्ड एरिया के साथ), मकान की वर्तमान फोटो और यह साबित करने वाले दस्तावेज कि कब्जा 31 मार्च 2004 से पहले का है (जैसे बिजली या पानी का बिल या वोटर कार्ड), संलग्न करना अनिवार्य है। निदेशालय की मंजूरी के बाद ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू होती है।