शहर के सेक्टर-6 और 7 के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन का बढ़ा हुआ मुआवजा देने के कोर्ट के आदेश के चार साल बाद भी हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की ओर से राशि जमा नहीं कराने पर एचएसवीपी प्रशासक व भूमि ग्रहण अधिकारी (एलओ) की गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। 16 जनवरी को एडीजे न्यायाधीश शैलेंद्र सिंह की कोर्ट में प्राधिकरण को फटकार लगाते हुए कहा गया है कि यदि 27 जनवरी तक मुआवजा जमा नहीं कराया गया तो सुनवाई किए बगैर सीधे गिरफ्तारी की जाएगी।
शहर के एचएसवीपी बाईपास व सेक्टर-6 व 7 के लिए प्राधिकरण की ओर से वर्ष 2006 में जमीन अधिग्रहण की गई थी। मुआवजा बढ़वाने की मांग को लेकर कुछ किसान कोर्ट में चले गए थे। लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने सितंबर 2016 में बढ़ी हुई राशि देने के आदेश दिए थे। लेकिन प्राधिकरण की ओर से राशि किसानों को नहीं दी गई। इस तरह के मामलों में एक किसान का दो करोड़ रुपये बकाया है। वहीं इसको लेकर अन्य किसानों का करीब 40 करोड़ रुपये फंसा हुआ है।
मुआवजा राशि देने में भी गड़बड़ी
मामला इतना भर ही नहीं है, एचएसवीपी की ओर से जो मुआवजा दिया गया था, उसमें भी गड़बड़ी पाई गई है। जिन लोगों को मुआवजा मिलना था, उनकी बजाय प्राधिकरण ने अन्य को मुआवजा दे दिया। बताया जा रहा है कि अधिकारियों ने बगैर किसी वेरिफिकेशन के करोड़ रुपये के चेक बांट दिए। इन्हीं में से एक रामचन्द्र की जमीन भी अधिग्रहण हुई थी। रामचन्द्र के वारिसों को मुआवजा राशि देने की बजाए अधिकारियों ने राम सिंह को करोड़ों रुपये का चेक थमा दिया। उदाहरण के तौर पर यह केवल एक मामला है, लेकिन इस तरह के अनेक मामले सामने आ रहे हैं।
रिकवरी के नाम पर गुमराह करने की कोशिश
मामले में किसानों की तरफ से पैरवी कर रहे एडवोकेट दिनेश लखेरा ने बताया कि कोर्ट में केस दायर किया गया था। कोर्ट को बताया गया था कि किस तरह मुआवजा गलत तरीके से बांटा गया है। कोर्ट ने राम सिंह से रिकवरी कर रामचन्द्र के परिवार को राशि देने का आदेश दिया था, लेकिन यहां भी अधिकारियों ने मामले को लटकाए रखा। उसके बाद 2019 में फिर कोर्ट में अपील की गई। लखेरा का कहना है कि सैकड़ों इस तरह के मामले सामने आए हैं। 16 जनवरी को न्यायाधीश ने एचएसवीपी के प्रशासक व एलओ के वारंट जारी करते हुए 27 जनवरी तक राशि जमा कराने के आदेश दिए हैं। बताया जा रहा है कि मामला दो करोड़ का नहीं कई किसानों का करीब 40 करोड़ रुपये का मुआवजा इसी तरह से अटका हुआ है।
मुआवजे को लेकर दफ्तर भी हो चुका है सील
धारूहेड़ा से भिवाड़ी तक बनाए गए बाईपास मामले में कोर्ट के आदेश पर सचिवालय के पास स्थित एचएसवीपी का दफ्तर सील कर दिया गया था। इसके अलावा जिमखाना पर भी ताला लगाकर महीनों बंद रखा गया था। इसके अलावा सेक्टर-4 का सामुदायिक केंद्र पर भी सील लगाई जा चुकी है। ऐसे में समझा जा सकता है कि प्राधिकरण के अधिकारियों की ढिलाई के चलते शहर के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इस संबंध में रेवाड़ी हुडा के ईओ दीपक घनघस ने कहा कि मामला कोर्ट में चल रहा था, भूमि अधिग्रहण अधिकारी व उच्च अधिकारियों की ओर से ही इसमें जवाब दिया जाना था। ऐसे में उनकी ओर से कोई भी टिप्पणी करना गलत है। जो भी सूचना आती है, उसे उच्चाधिकारियों को भेज दिया जाता है।