बावल में सत्संग सुनाते बाबा उमाकांत महाराज। स्रोत : ग्रामीण
बावल। संत बाबा उमाकांत महाराज ने बावल में आयोजित सत्संग में कहा कि प्रभु को याद करने से उनकी दया प्राप्त होती है और इंसान जीवन में कदम-कदम पर उनकी दया का अनुभव करता है। पहले गृहस्थ लोग सुबह-शाम कुछ समय प्रभु को याद करने का नियम बनाकर रखते थे।
उन्होंने कहा कि लोग अपनी परंपरा और रीति-रिवाज के अनुसार प्रभु का नाम स्मरण करते थे तथा धार्मिक चर्चाएं सुनते और करते थे। इसका असर बच्चों के संस्कारों पर भी पड़ता था।
बच्चे घर में बड़ों से धार्मिक बातें सुनकर अच्छे संस्कार ग्रहण करते थे और उनका ध्यान गलत चीजों की ओर कम जाता था। महिलाओं के बारे में उन्होंने कहा कि धार्मिक बातें सुनते-सुनते उनके भीतर भी ज्ञान और अच्छे संस्कार विकसित होते थे।
बाबा उमाकांत ने कहा कि प्रभु का स्मरण करने से व्यक्ति के भीतर संस्कार बनते हैं और विश्वास मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि आज लोगों का प्रभु पर विश्वास कम होता जा रहा है। उन्होंने बच्चों में बढ़ती नशे की आदत पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहले बच्चे मेहनत और शारीरिक गतिविधियों से शरीर को मजबूत रखते थे, जबकि आज नशे की आदतों से स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने संयम और नियम के पालन पर जोर देते हुए कहा कि जो व्यक्ति संयमित जीवन जीता है, उसकी बुद्धि सही रहती है। सात्विक भोजन से मन को स्थिर रखने में मदद मिलती है और व्यक्ति का ध्यान गलत प्रवृत्तियों की ओर कम जाता है।