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Rewari News: सरकारी स्कूलों का होगा सोशल ऑडिट, अब जनता करेगी खर्च की निगरानी

Fri, 16 Jan 2026 11:46 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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रेवाड़ी। अब सरकारी स्कूलों पर होने वाले खर्च की निगरानी जनता खुद करेगी। कक्षा में पंखा लगा है या नहीं, बच्चों को किताबें, छात्रवृत्ति और यूनिफॉर्म मिली या नहीं, दिव्यांग विद्यार्थियों को सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं, स्कूल भवन और शौचालय की स्थिति कैसी है और शिक्षक नियमित आते हैं या नहीं, इन सभी सवालों के जवाब अब फाइलों में नहीं, बल्कि गांव, मोहल्ले और अभिभावकों की गवाही से तय होंगे।
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समग्र शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश में सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) शुरू करने की औपचारिक तैयारी पूरी कर ली गई है। इसके लिए एससीईआरटी हरियाणा की ओर से गुरुग्राम में 9 और 10 जनवरी को दो दिवसीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इसमें राज्य के सभी जिलों से आए अधिकारियों और कर्मचारियों को सामाजिक अंकेक्षण की पूरी कार्यप्रणाली सिखाई गई। सामाजिक अंकेक्षण की रिपोर्ट चार स्तरों पर तैयार की जाएगी।
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हर स्कूल से बनी रिपोर्ट ब्लॉक स्तर पर जाएगी। वहां से जिला और अंत में राज्य स्तर पर समग्र शिक्षा की पूरी तस्वीर सार्वजनिक होगी। इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी राज्य में गठित सोशल ऑडिट यूनिट को दी गई है जो प्रशिक्षकों की नियुक्ति, कैलेंडर तैयार करने, टीम भेजने और रिपोर्ट सार्वजनिक करने तक की पूरी व्यवस्था संभालेगी।
जब सामाजिक अंकेक्षण की टीम किसी स्कूल में पहुंचेगी तो वहां केवल अधिकारी ही नहीं होंगे बल्कि हर कक्षा के बच्चे, शिक्षक, प्रधानाचार्य, प्रशासनिक स्टाफ, अभिभावक, दिव्यांग बच्चों के माता-पिता और आसपास के लोग भी इसमें शामिल होंगे।
इनसे सीधे सवाल पूछे जाएंगे कि बच्चों को समय पर किताबें और छात्रवृत्ति मिली या नहीं, स्कूल में पानी, शौचालय, पंखा और सुरक्षा व्यवस्था की क्या स्थिति है, शिक्षक नियमित आते हैं या नहीं, स्कूल डेवलपमेंट प्लान लागू हुआ या नहीं और कमजोर व दिव्यांग बच्चों को उनका अधिकार मिला या नहीं।

जांच से होगी हर दावे की पड़ताल
सरकारी योजनाओं और शैक्षणिक संस्थानों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक अंकेक्षण को सख्ती से लागू किया जाएगा। इसका मूल सिद्धांत यही है कि किसी भी जानकारी को बिना देखे सही नहीं माना जाएगा बल्कि हर दावे की जमीनी स्तर पर जांच की जाएगी। यदि लाइब्रेरी रजिस्टर में किताबें जारी दिखाई गई हैं तो बच्चों से सीधे पूछा जाएगा कि उन्हें वास्तव में किताबें मिली हैं या नहीं। भवन मरम्मत का दावा होने पर दीवारों, छत और कमरों की वास्तविक स्थिति भी देखी जाएगी। वहीं, उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज छात्रों की पुष्टि छात्रों और उनके अभिभावकों से कराई जाएगी। अंकेक्षण के दौरान फर्जी प्रविष्टियों, दिखावटी कार्यों और कागजों में दर्ज झूठे दावों की पोल खोली जाएगी। इसका मकसद व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और जिम्मेदारों को जवाबदेह बनाना है।
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स्कूल और गांव में होगी जनसुनवाई, रखी जाएगी पूरी रिपोर्ट
हर सामाजिक अंकेक्षण के बाद उसी स्कूल या गांव में जनसुनवाई आयोजित की जाएगी। इसमें पूरी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से लोगों के सामने रखी जाएगी। इस दौरान प्रधानाचार्य, शिक्षक और संबंधित अधिकारी मौजूद रहेंगे और जनता के सवालों के जवाब देंगे। जनसुनवाई के बाद ही रिपोर्ट ब्लॉक और जिला स्तर पर भेजी जाएगी। यह प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए, इसके लिए सरकार ने हर स्कूल के लिए अलग से बजट भी तय किया है। सामाजिक अंकेक्षण करने वाले लेखा परीक्षकों को मानदेय दिया जाएगा। साथ ही जनसुनवाई की व्यवस्था, स्टेशनरी और प्रशिक्षण के लिए भी हजारों रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सामाजिक अंकेक्षण गंभीरता से हो और सिर्फ कागजी कार्रवाई बनकर न रह जाए। इससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और जवाबदेही भी तय होगी।
वर्जन
सोशल ऑडिट का मकसद किसी को दोषी ठहराना नहीं बल्कि स्कूलों की व्यवस्था को बेहतर बनाना और जनता का भरोसा मजबूत करना है। जब योजनाओं की जांच बच्चों, अभिभावकों और समुदाय की नजर से होगी तो लापरवाही और अनियमितताओं पर अपने आप लगाम लगेगी।-सुंदर सिंह, एपीसी रेवाड़ी।
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