रेवाड़ी। एक पखवाड़े से पानी की राशनिंग से जूझ रहे शहरवासियों को अभी कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। जवाहर लाल नेहरू नहर में शनिवार रात को पानी छोड़ा गया है, लेकिन वह पर्याप्त नहीं है। इस बार पानीपत स्थित खुबडू हेड से नहर में 16 दिन के बजाय 8 ही दिन पानी दिया गया है। कम मिलने की स्थिति में शहर की जलापूर्ति अभी कुछ और दिन के लिए एक दिन छोड़कर एक दिन ही चलाई जाएगी।
जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लोगों से पानी को व्यर्थ न बहाने की अपील कर रहे हैं। बता दें कि सिंचाई विभाग के पास 31 मार्च को पानी आने का शेड्यूल आया था, लेकिन अब एक सप्ताह की देरी से पानी मिल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि जेएलएन नहर में 6 मार्च को पानी आना बंद हुआ था। शेड्यूल के पानी 31 मार्च को आना था।
शहर में पेयजल राशनिंग करीब चार साल से चल रही है। नहरी पानी का शेड्यूल पहले 16-16 दिन का था। यानी 16 दिन नहर में पानी आता था और 16 दिन नहर बंद रहती थी। चार साल से शेड्यूल 16-24 का हो गया है। अब 16 दिन नहर में पानी आता है और 24 दिन बंद रहता है। अब 6 मार्च को नहरी पानी आना बंद हुआ है। ऐसे में जनस्वास्थ्य विभाग के पास अब इतनी स्टोरेज क्षमता नहीं है कि शहरवासियों को हर दिन पेयजल सप्लाई दी जा सके। इसलिए ही हर माह पेयजल राशनिंग की जाती है।
शहर में नहरी पानी पर पेयजल आपूर्ति आधारित है। नहर के पानी को कालाका और लिसाना में बने वाटर टैंक में स्टोर किया जाता है। वहां से बूस्टिंग स्टेशन के माध्यम से शहर में पानी की आपूर्ति होती है। कालाका जलघर में बनाए गए 5 वाटर टैंकों से शहर के 70 फीसदी हिस्से में पेयजल की आपूर्ति होती है। वहीं, लिसाना स्थित जलघर के तीन वाटर टैंकों से 30 फीसदी भाग में पानी सप्लाई होता है। दोनों जलघरों से पूरे शहर को 15 से 20 दिन ही पानी आपूर्ति हो सकती है।
इंसेट
शहर नहरी पानी पर निर्भर
रेवाड़ी में जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से शहर के 27 हजार घरों तक हर महीने करीब 45 हजार लाख लीटर पानी की आपूर्ति की जाती है। इसमें झज्जर रोड स्थित गांव लिसाना से 80 लाख एवं कालाका से करीब 170 लाख लीटर पानी दिया जाता है। भू-जल स्तर बहुत नीचे एवं फ्लोराइडयुक्त होने के कारण शहर के लोगों के पास नहरी पानी के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है।
वर्जन
नहर में सिंचाई विभाग की ओर से इस बार पानी कम छोड़ा गया है। ऐसे में शहरवासियों को कुछ दिनों तक एक दिन छोड़कर पानी दिया जाएगा। लोगों से अपील है कि पानी को व्यर्थ न बहाएं।- हेमंत कुमार, जेई, जनस्वास्थ्य विभाग