रेवाड़ी। नए साल की शुरुआत के साथ ही कड़ाके की ठंड का दौर फिर से शुरू हो गया है। सोमवार को इस साल का पहला घना कोहरा सड़कों पर दिखाई दिया। शहर के साथ-साथ बाहरी इलाके में भी घनी धुंध छाई रही। साथ ही न्यूनतम तापमान भी आधा डिग्री लुढ़क कर 3.5 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है, जबकि अधिकतम तापमान 16.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
पिछले चार दिनों से अधिकतम और न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी से फिर से गर्मी का अहसास होने लगा था, लेकिन सोमवार सुबह 7 बजे अचानक सड़कों पर कोहरा छाने लगा। 8 बजे तक शहर के अलावा पूरे ग्रामीण इलाके में घने कोहरे की चादर बिछ गई। मौसम विज्ञान विभाग ने पहले ही कड़ाके की ठंड की संभावना जताई थी और ठीक उसी संभावना के बीच फिर से कंपकंपा देने वाली ठंड शुरू हो गई है।
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पिछले 4 दिनों की बात करें तो ठंड से पूरी तरह राहत मिली हुई थी। 26 दिसंबर के बाद लगातार दिन के साथ रात का पारा भी लगातार बढ़ रहा था। इसकी वजह से सुबह व शाम के समय ही ठंड पड़ रही थी। रविवार को अचानक मौसम ने करवट बदली और न्यूनतम तापमान 11.6 डिग्री से गिरकर 4 डिग्री पर आ गया। सोमवार को इसमें आधा डिग्री की गिरावट के साथ 3.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं अधिकतम भी 21 डिग्री से साढ़े चार डिग्री की गिरकर 16.5 डिग्री पर आ गया।
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गेहूं और सरसों की फसल में अच्छा फुटाव
बावल कृषि अनुसंधान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक डॉ. धर्मबीर का कहना है कि अगले कुछ दिन मौसम परिवर्तनशील रहेगा। पाला जमने की भी संभावनाएं है। इसलिए किसानों को फसलों की हल्की सिंचाई करते रहने की जरूरत है। ताकि फसलों को पाला जमने की स्थिति में नुकसान ना हो। अभी गेहूं और सरसों की फसल में अच्छा फुटाव है।
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चिकित्सक बोले-बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत
शहर के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. रणवीर सिंह ने बताया कि इस मौसम में बच्चों में कई तरह की बीमारियां होने की आशंका रहती है, जबकि बुजुर्गों को भी इस समय सावधानी बरतने की आवश्यकता है। बदलते मौसम में बच्चों में निमोनिया होने की आशंका रहती है। गुलाबी ठंड के बाद सुबह शाम गलन बढ़ने लगी है। ऐसे मौसम में बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. लतेश अरोड़ा ने बताया है कि अधिकतर बच्चे सर्दी, खांसी, बुखार के चपेट में आ रहे है। कुछ बच्चों में डायरिया के भी असर देखने को मिल रहे। ठंड लगने के कारण कोल्ड डायरिया होने का खतरा भी बढ़ जाता है। इस मौसम में बच्चों में सर्दी, खांसी, निमोनिया और पीलिया होने की संभावना अधिक रहती है।