संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिले के झाबुआ और आसपास के क्षेत्रों में ढाई महीने तक आतंक फैलाने वाले टाइगर एसटी 2303 रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व, बूंदी, राजस्थान में वर्चस्व की लड़ाई में मारा गया। यह युवा बाघ एक अन्य नर बाघ की सीमा में घुस गया था और वर्चस्व को लेकर दोनों के बीच हुई भिड़ंत में उसकी जान चली गई।
सरिस्का टाइगर रिजर्व से भटक कर सितंबर में झाबुआ क्षेत्र में आए इस बाघ के आतंक से भयभीत लोगों ने खेतों में जाना छोड़ दिया था। नवंबर 2024 में इस बाघ को पकड़ा गया था। गांव झाबुआ में राजस्थान और हरियाणा की वाइल्डलाइफ टीमों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू कर बाघ को पकड़ा था और उसे रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व बूंदी, राजस्थान में छोड़ा गया था। दो दिन पहले ही उसे खुले जंगल में छोड़ा गया था। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार नर बाघ अपनी सीमा को लेकर बेहद आक्रामक होते हैं और अपने इलाके को किसी अन्य बाघ को नहीं आने देते हैं। अगर कोई दूसरा बाघ उनकी सीमा में घुस जाए तो दोनों में भिड़ंत होती है। ऐसे ही भिड़ंत में बाघ एसटी 2303 एसटी मारा गया।
रेस्क्यू ऑपरेशन का हिस्सा रहे वन्यजीव प्रेमियों ने इस बाघ की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। वन विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार इस युवा बाघ की मौत वर्चस्व की लड़ाई के दौरान वहां पहले से मौजूद एक बड़े नर बाघ के हमले में हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही बाघ की मौत के कारणों की पुष्टि हो पाएगी।
वन्यजीव प्रेमियों में शोक की लहर
करीब 200 किलो वजन, 10 फीट लंबा यह युवा बाघ बेहद सुंदर और स्वस्थ था। गुरुग्राम निवासी वन्यजीव प्रेमी अनिल के मुताबिक इस बाघ से उनका खास लगाव था और वे लगातार अधिकारियों से इसका हालचाल पूछते रहते थे। अब इसकी अचानक मौत ने सभी को दुखी कर दिया है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि टाइगर रिलोकेशन प्रोग्राम में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है, ताकि इस तरह के दुर्भाग्यपूर्ण हादसों से बचा जा सके। फिलहाल वन विभाग इस मामले की गहन जांच कर रहा है।