रेवाड़ी। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में रिश्वतखोरी के मामले में तत्कालीन डीएफएससी अशोक रावत पर पहले भी कई आरोप लगे हैं।
अर्बन इस्टेट निवासी सेवानिवृत्त स्टोरकीपर ईश्वर सिंह ने 18 जनवरी 2017 में घर में फंदा लगाकर आत्महत्या की थी। पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला था। इसमें डीएफएससी अशोक रावत समेत 3 लोगों पर साजिश के तहत प्रताड़ित करने के आरोप लगाए गए थे। पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर ही भतीजे की शिकायत पर तीनों पर आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने व एससी/एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की थी।
इसके बाद परिजनों ने लगभग एक सप्ताह तक नागरिक अस्पताल में गिरफ्तारी की मांग को लेकर धरना दिया था। बाद में परिवहन मंत्री के आश्वासन के बाद परिजनों ने शव को उठा लिया था। अशोक रावत पर लेखाकार (अकाउंटेंट) पर डिपोधारकों से 2.90 लाख रुपये घूस लेने के आरोप लगे थे।
दिसंबर 2024 में यह मामला उजागर हुआ था। मुख्य सतर्कता अधिकारी द्वारा मामले में जांच की गई थी। जांच अधिकारी ने डीएफएससी व अकाउंटेंट को रिकॉर्ड व शिकायतकर्ता को सबूतों के साथ तलब किया था। इससे पहले सुसाइड नोट में रिटायर्ड कर्मचारी ने सरकारी गेहूं बेचने के आरोपों में फंसाने की बात लिखी थी। वहीं 2022 में सोनीपत में डिपो के सस्पेंड लाइसेंस को बहाल करने के मामले में घूसखोरी के आरोप सामने आए थे। जहां भी अधिकारी ड्यूटी पर रहे वहां कार्रवाई हुई है। हालांकि किसी मामले अभी आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं। केवल आरोप लगते रहे हैं। इस बार भी यही हुआ है।
ये है इस बार का पूरा मामला:
बता दें कि रेवाड़ी में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में सामने आए रिश्वतखोरी के मामले में ऑडियो रिकॉर्डिंग सबसे बड़ा सबूत बनकर उभरी है। राशन डिपो की सप्लाई बंद न करने के बदले 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में विभाग के उपनिरीक्षक रह चुके जयवीर पर एफआईआर दर्ज की गई है। साथ ही डीएफएससी रह चुके अशोक रावत पर भी एफआईआर हुई है। मामले में अशोक रावत की सीधी भूमिका है या नहीं इसकी जांच की जाएगी।
यह कार्रवाई के राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो गुरुग्राम द्वारा की गई है। शिकायत के अनुसार गांव निमोठ निवासी मोहित ने आरोप लगाया है कि उसके राशन डिपो का 19 जून 2025 को विभागीय निरीक्षण किया गया था, जिसके बाद 2 हजार रुपये का चालान किया गया। जब वह अपने पिता नरेश कुमार के साथ 3 नवंबर 2025 को डीएफएससी कार्यालय रेवाड़ी पहुंचे तो वहां तैनात उपनिरीक्षक जयवीर ने सप्लाई बंद न करने के बदले 20 हजार रुपये की मांग की।