सोमवार को मंदिर में जलाभिषेक करती महिला
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सावन माह के पहले सोमवार को शिवालयों में भक्तों की खासी भीड़ उमड़ी। हर-हर महादेव के उद्घोष के बीच श्रद्धालुओं ने शिवलिंग में जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। श्रद्धालुओं ने शिवालयों में गंगाजल, दूध, दही से जलाभिषेक कर बेलपत्र, चावल व पुष्प से भगवान शिव की पूजा की। उत्तरकाशी में काशी विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक को लेकर सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। शहर के सोलहराही, बाराहजारी व घंटेश्वर मंदिर में सुबह करीब पांच बजे से श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रही।
जिले भर के मंदिरों में विशेष तैयारियां की गई है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार सावन पांचवां महीना होता है, जिसे काफी शुभ माना जाता है ।इस बार सावन माह में चार सोमवार है। सावन के सोमवार का विशेष महत्व माना जाता है। शहर के सोलहराही तालाब स्थित भूतेश्वर महादेव मंदिर, मोती चौक बाजार स्थित घंटेश्वर महादेव मंदिर व बारापत्थर शिव मंदिर सहित अन्य शिवालयों में पहले सोमवार की पूजा अर्चना के लिए गंगाजल की विशेष व्यवस्था की गई। सोलह सोमवार व्रत का शुभारंभ सावन की शुरुआत 17 जुलाई से हुई थी। 15 अगस्त को सावन का आखिरी दिन है। पहला सोमवार 22 जुलाई, दूसरा सोमवार 29 जुलाई व तीसरा सोमवार 5 अगस्त व चौथा सोमवार 12 अगस्त है। पंडित रोहिताश शर्मा के अनुसार सावन में भगवान भोलेनाथ की पूजा करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है ।बहुत से लोग तो सावन के पहले सोमवार से ही सोलह सोमवार व्रत की शुरुआत करते हैं। इसके अतिरिक्त सावन के मंगलवार को किए जाने वाले वर्त को मंगला री व्रत कहा जाता है। श्रावण में रुद्राष्टाध्यायी के मंत्र पाठ के साथ जल, दूध, पंचामृत, आमरस, गन्ने का रस, नारियल के जल व गंगाजल आदि से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है इसे रुद्राभिषेक कहते हैं। कांवड़ लानी हुई शुरू सावन के माह में हजारों की तादाद में श्रद्धालु कांवड़ भी लेकर आते हैं। राजस्थान व हरियाणा के विभिन्न हिस्सों से गए बहुत से श्रद्धालु कांवड़ में गंगाजल भरकर वापसी भी आने लगे हैं। 30 जुलाई को शिवरात्रि का पर्व है और कांवड़ियों द्वारा भगवान शंकर की विशेष पूजा हरिद्वार व ऋषिकेश से लाए गए गंगाजल की जाती है।