रेवाड़ी। दिल्ली-जयपुर हाईवे पर कापड़ीवास से लेकर खेड़ा बॉर्डर तक वाहन चालकों की डगर आसान नहीं है। इस 40 किमी की दूरी में दोनों हाईवे के दोनों तरफ बनाए गए नाले को मिट्टी से पाटकर 200 से अधिक अवैध कट बनाए गए हैं। इन अवैध कटों के चलते आए दिन हादसों में लोगों के परिवार उजड़ रहे हैं। जिले में प्रत्येक साल औसतन सड़क दुर्घटनाओं में 215 लोगों की मौत होती है और 350 से अधिक लोग घायल हो रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर प्रशासन की ओर से प्रत्येक माह सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में अवैध कटों से लेकर गड्ढों को भरने के आदेश दिए जाते हैं। लेकिन हाईवे अथॉरिटी के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती है। इसका बड़ा कारण हाईवे पर खुले बड़े-बड़े ब्रांड के होटल व ढाबा संचालकों का दबाव है। क्योंकि डीसी की ओर से 28 मई आयोजित बैठक में अवैध कटों को 10 जून से पहले बंद करने के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन आज तक एक भी अवैध कट बंद नहीं किया गया।
तालमेल के अभाव में लोगों की जान पर खतरा
रेवाड़ी जिले से तीन नेशनल हाईवे गुजरते हैं। इनमें दिल्ली-जयपुर हाईवे संख्या-48 देश के सबसे व्यस्त राजमार्गों में से एक है। लेकिन गुरुग्राम सीमा पर कापड़ीवास से लेकर धारूहेड़ा, बावल तक हाईवे बदहाल है। अवैध कट के अलावा जगह-जगह से रेलिंग टूटी हुई है। हाईवे के किनारों पर झाड़ उगे हुए हैं, वहीं रोड किनारे बजरी पड़ी होने के चलते कभी भी दुपहिया वाहन फिसल सकता है। निगरानी नहीं हो पाने का बड़ा कारण विभागों के बीच में तालमेल का अभाव है। यूं तो हाईवे की निगरानी का जिम्मा राष्ट्रीय राजमार्ग अथॉरिटी का है, लेकिन हाईवे पर बनाए जा रहे अवैध होटल व ढाबों के निर्माण को रोकना नगर योजनाकार विभाग का काम है। पिछली बैठक में डीसी कह चुके हैं कि किसी भी कार्य को एक दूसरे के ऊपर छोड़ना यह दर्शाता है कि विभाग अपने कार्यों के प्रति समर्पित नहीं हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सड़कों के गड्ढों पर तुरंत पैच कार्य हो।
हाईवे से साइन बोर्ड गायब, रात में अंधेरा
बैठक में अवैध कटों के अलावा एक सप्ताह के अंदर साइन बोर्ड लगाने के आदेश दिए गए थे, लेकिन हालात में रत्ती भर भी सुधार नहीं आ सका है। नेशनल हाईवे पर अवैध कटों को बंद करने के लिए पुलिस की मदद की जरूरत हो तो डीएसपी अमित भाटिया से संपर्क करने की बात कही गई थी। इसके अलावा दिल्ली-जयपुर हाईवे के साबन चौक, हल्दीराम चौक, धारूहेड़ा व आसलवास फ्लाईओवर के पास सड़क के बीच बने गड्ढों को भरा जाना था।
12 बिंदुओं पर होना था कार्य
आरटीए सचिव गजेंद्र कुमार के अनुसार ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा नेशनल हाईवे पर 12 बिंदुओं पर कार्य किया जाना है, ताकि सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
सड़क दुर्घटनाओं में वर्ष 2019 में 371 लोग घायल हुए, 212 की मृत्यु हो गई। वर्ष 2020 में 396 लोग घायल हुए और 215 की मृत्यु हो गई। वर्ष 2021 में अप्रैल माह तक 137 व्यक्ति घायल हुए और 48 की मृत्यु हो चुकी है। अधिकारियों की ओर से मंथन के बावजूद अथॉरिटी की ओर से 12 बिंदु तो दूर एक पर भी कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
दिल्ली-जयपुर हाईवे के मैनेजर एचएस गिला ने कहा कि प्रशासन की ओर से हमें खेड़ा बॉर्डर से लेकर 12 स्थानों पर अवैध कटों की सूची दी गई थी। एसएचओ को लेकर सभी कटों को बंद किया गया है। ढाबों व होटलों के सामने बने कटों की जांच की जाएगी। यदि ऐसा है तो कार्रवाई करते हुए उन्हें बंद किया जाएगा।