धारूहेड़ा। दिल्ली-जयपुर नेशनल हाईवे-48 पर स्थित धारूहेड़ा नगर पालिका क्षेत्र तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है। पिछले एक दशक में यहां आबादी और क्षेत्रफल दोनों में तेजी से इजाफा हुआ है जिसका असर नगर पालिका के वार्डों की संख्या पर भी साफ दिखाई देता है। 2020 के चुनाव में 17 वार्ड थे अब 2026 के चुनाव में कुल 18 वार्ड हो चुके हैं।
धारूहेड़ा को वर्ष 2008 में नगर पालिका का दर्जा दिया गया था। इससे पहले यह एक साधारण कस्बा था, लेकिन औद्योगिक विकास के चलते इसे शहरी निकाय में शामिल किया गया। शहर के रूप में इसका इतिहास अभी दो दशक भी पूरा नहीं कर पाया है, लेकिन विकास की रफ्तार तेज रही है।
पहले प्रधान बने पवन राव
नगर पालिका बनने के बाद पहले चुनाव में पवन राव को प्रधान चुना गया। उनके कार्यकाल में नगर पालिका की बुनियादी संरचना को विकसित करने की शुरूआत हुई थी।
2014 में पहली महिला प्रधान
वर्ष 2014 में हुए चुनाव में प्रेम राव को पहली महिला प्रधान बनने का मौका मिला। इस चुनाव ने स्थानीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को नई दिशा दी।
2020 में प्रत्यक्ष चुनाव, कंवर सिंह बने चेयरमैन
वर्ष 2020 में नगर निकाय चुनावों में बड़ा बदलाव करते हुए चेयरमैन का प्रत्यक्ष चुनाव लागू किया गया। इस चुनाव में कंवर सिंह को जनता ने सीधे वोट देकर चेयरमैन चुना। वे धारूहेड़ा के पहले प्रत्यक्ष रूप से चुने गए चेयरमैन बने। इस बार चुनाव में चेयरमैन पद के लिए भाजपा से अजय जांगड़ा और कांग्रेस से कुमारी राज प्रत्याशी हैं।
नगर परिषद बनने की ओर बढ़ते कदम
मौजूदा समय में धारूहेड़ा की आबादी करीब 1.50 लाख तक पहुंच चुकी है। तेजी से बढ़ती जनसंख्या और शहरी विस्तार को देखते हुए नगर पालिका को भविष्य में नगर परिषद का दर्जा मिलने की संभावना जताई जा रही है। इस दिशा में वर्ष 2025 में प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजा जा चुका है। 2011 की जनगणना के हिसाब से आबादी 30 हजार के आसपास थी।
विकास के साथ बढ़ी जिम्मेदारियां
पूर्व डीपीआरओ जेपी सिंह ने बताया कि धारूहेड़ा के औद्योगिक हब के रूप में विकसित होने के कारण यहां रोजगार के अवसर बढ़े हैं और बाहरी आबादी भी तेजी से बस रही है। ऐसे में नगर पालिका पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है।