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Rewari News: गांव टांकड़ी के तीन और स्वतंत्रता सेनानियों का सामने आया इतिहास

Wed, 16 Sep 2026 11:24 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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गौरव पट्ट पर नहीं है गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों का नाम। स्रोत : एसोसिएशन
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बावल। गांव टांकड़ी के तीन ऐसे स्वतंत्रता सेनानियों के नाम और दस्तावेज सामने आए हैं, जिनका उल्लेख गांव के मौजूदा गौरव पट्ट पर नहीं है। शोधकर्ताओं ने राष्ट्रीय अभिलेखागार के पुराने रिकॉर्ड खंगालकर इन तीनों सेनानियों के आजाद हिंद फौज (आईएनए) से जुड़े होने के दस्तावेज जुटाए हैं। अब इनके नाम गांव के गौरव पट्ट पर दर्ज कराने की मुहिम शुरू की गई है।
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शोधकर्ता भगवान फौगाट और अमर शहीद स्वतंत्रता सेनानी नेत राम लोहचब के पड़पोते ने राष्ट्रीय अभिलेखागार के रिकॉर्ड के आधार पर इन स्वतंत्रता सेनानियों की जानकारी सामने रखी है। दस्तावेजों के अनुसार टांकड़ी निवासी हीरा सिंह, सूरज भान सिंह और सुल्तान सिंह प्रथम बहावलपुर इन्फैंट्री में सेवाएं दे चुके थे और बाद में आजाद हिंद फौज में शामिल हुए थे।
रिकॉर्ड के मुताबिक हीरा सिंह पुत्र शिव सहाय का जन्म 1921 में टांकड़ी में हुआ था। वे प्रथम बहावलपुर इन्फैंट्री में सिपाही नंबर 8771 के रूप में भर्ती हुए थे। बाद में आईएनए की द्वितीय डिवीजन हेडक्वार्टर में सिपाही के रूप में शामिल हुए।
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सूरज भान सिंह पुत्र जोरावर सिंह का जन्म भी 1921 में टांकड़ी में हुआ था। वे प्रथम बहावलपुर इन्फैंट्री में सिपाही नंबर 8516 थे और बाद में आईएनए की बॉडीगार्ड यूनिट में सेवाएं दीं। सुल्तान सिंह पुत्र सोहन सिंह का जन्म 1916 में हुआ था। वे प्रथम बहावलपुर इन्फैंट्री में सिपाही नंबर 8662 रहे और बाद में आईएनए की 10वीं रेजिमेंट में शामिल हुए।

मौजूदा गौरव पट्ट पर नहीं हैं नाम
जिला सिग्नल्स वेटरंस एसोसिएशन के प्रधान सेवानिवृत्त कैप्टन सतीश कुमार राठौर ने गांव के मौजूदा गौरव पट्ट की तस्वीर साझा की है। इसमें गांव के कुछ शहीदों के नाम दर्ज हैं, लेकिन शोधकर्ताओं द्वारा सामने लाए गए इन तीनों स्वतंत्रता सेनानियों के नाम अंकित नहीं हैं। कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर इन स्वतंत्रता सेनानियों के नाम भी गांव के गौरव पट्ट पर दर्ज किए जाने चाहिए। उनका उद्देश्य ऐसे स्वतंत्रता सेनानियों की पहचान सामने लाना है, जिनके योगदान का स्थानीय स्तर पर रिकॉर्ड या स्मरण नहीं हो पाया है, ताकि नई पीढ़ी उनके इतिहास से परिचित हो सके।
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