प्रकृति की मार से किसान कराह रहा है। अब वह सरकार से मरहम के लिए उम्मीद कर रहा है। सुबह से शाम हो रही है लेकिन मुआवजे के लिए आवेदन करने वाले किसानों की लाइन कम नहीं हो रही है। सोमवार की शाम तक करीब 4500 किसान अपनी फसलों को हुए नुकसान के लिए आवेदन कर चुके थे जबकि काफी संख्या में किसान कृषि विभाग के कार्यालय में मुआवजे की मांग को लेकर आवेदन जमा कराने के लिए लाइन में खड़े थे। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले चार दिन तक हुई बारिश के कारण किसानों को करीब 25 से 75 फीसदी नुकसान हुआ है। बारिश के कारण जिले में करीब 43 हजार हेक्टेयर भूमि में फसलों को नुकसान है जिसमें करीब 35 हजार हेक्टेयर भूमि में बाजरे की फसल व करीब आठ हजार हेक्टेयर भूमि में कपास की फसल को 25 से 50 फीसदी नुकसान हुआ है। खेते से लेेकर अनाज मंडी तक बाजरे व कपास की फसल को नुकसान हुआ है। सुबह ही बड़ी संख्या में किसान कृषि विभाग के कार्यालय में पहुंच जाते हैं। किसानों को घंटों अपनी बारी आने के लिए लाइनों में खड़े होकर इंतजार करना पड़ रहा है।
कपास का होगा सर्वे, बाजरे के लिए किसी को नहीं जानकारी
कृषि विभाग के अनुसार 19 सिंतबर के बाद जो बाजरे की फसल खराब हुई है। उसमें हुए नुकसान का अभी सर्वे होगा या नहीं उसके बारे में किसी को भी जानकारी नहीं है कि किसानों को इसका मुआवजा मिलेगा या नहीं। किसानों को बीमा कंपनी की तरफ से 15 सितंबर तक कटाई व 19 सितंबर तक कढ़ाई के लिए समय निर्धारित किया गया था जबकि पिछले दिनों बारिश के कारण बाजरे की बिजाई भी देरी से हुई थी। जिसकी वजह से बाजरे की पछेती फसल बारिश की चपेट में आ गई है। कपास की फसल के नुकसान का सर्वे अवश्य होगा।
किसानों की फसलों को बारिश के कारण 25 से 75 फीसदी नुकसान होने का अनुमान है। सर्वे के बाद स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो जाएगी। सरकार व बीमा कंपनी को नुकसान के अनुसार सर्वे कर मुआवजा देना चाहिए।
- डॉ. संजय यादव, प्रधान, एडीओ एसोसिएशन, रेवाड़ी।
जिले में कहीं भी बारिश के कारण जलभराव नहीं हुआ है। हालांकि फसलों में नुकसान है। इसके लिए राजस्व विभाग व कृषि विभाग के अधिकारियों की संयुक्त कमेटी का गठन किया गया है जो नुकसान का आंकलन करेंगी। किसानों से मुआवजे के लिए आवेदन लिए जा रहे हैं। जिन पर सरकार के निर्देशानुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी।
- अशोक कुमार गर्ग, डीसी, रेवाड़ी।