रेवाड़ी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अंकिता शर्मा की अदालत ने 11 करोड़ रुपये के कर्ज विवाद से जुड़े माॅडल टाउन निवासी विपिन गोयल के आत्महत्या मामले में आरोपी न्यू बस्ती निवासी देवीदयाल गुप्ता की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि यह मामला गंभीर है। प्रथम दृष्टया आरोपी की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि उम्र और बीमारी अग्रिम जमानत का आधार नहीं हो सकती।
मामला थाना मॉडल टाउन में 1 अक्तूबर 2025 को दर्ज एफआईआर से संबंधित है। शिकायतकर्ता विकास गोयल ने आरोप लगाया था कि उनके छोटे भाई विपिन गोयल रेवाड़ी मार्केट में वित्तीय ब्रोकर के रूप में कार्य करते थे। उन्होंने कई व्यापारियों और फर्मों के लिए 11 करोड़ रुपये ऋण की व्यवस्था कराई थी।
इनमें देवीदयाल गुप्ता सहित उसके परिवार से जुड़े कई लोग शामिल थे। आरोप है कि ऋण की राशि वापस न मिलने, टालमटोल करने और कथित ब्लैकमेलिंग के कारण विपिन गोयल तनाव में आ गए। 23 मई 2025 को विपिन गोयल ने फैक्टरी परिसर में जहर खाकर आत्महत्या कर ली।
बाद में उनके घर से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ जिसकी हैंडराइटिंग एफएसएल रिपोर्ट के अनुसार विपिन गोयल की पाई गई। सुसाइड नोट में देवीदयाल गुप्ता का नाम भी दर्ज बताया गया था।
मामले में देवीदयाल गुप्ता ने अदालत में दायर अग्रिम जमानत याचिका में खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि केवल सुसाइड नोट में नाम आ जाना अपराध सिद्ध नहीं करता। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि ऋण न लौटाना आत्महत्या के लिए उकसावे की श्रेणी में नहीं आता।
न ही आरोपी की ओर से कोई प्रत्यक्ष उकसावे का कृत्य किया गया है। साथ ही आरोपी की उम्र करीब 75 वर्ष होने, स्वास्थ्य खराब होने और ब्रेन स्ट्रोक से पीड़ित होने का हवाला दिया गया।
पीड़ित पक्ष के वकील ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी का नाम सुसाइड नोट में स्पष्ट रूप से दर्ज है। मृतक और आरोपी के बीच बातचीत के साक्ष्य मौजूद हैं। आत्महत्या आरोपी के परिवार की फैक्टरी में हुई है।
इन परिस्थितियों में आरोपी की हिरासत में पूछताछ जरूरी है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने देवी दयाल गुप्ता की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
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आरोपी प्रेम नारायण की अग्रिम जमानत याचिका हो चुकी है खारिज
मामले में जनवरी के पहले सप्ताह में आरोपी प्रेम नारायण गुप्ता की अग्रिम जमानत याचिका को अदालत खारिज कर चुकी है। अदालत में आरोपी की ओर से दलील दी गई थी कि वह 62 वर्ष का है। उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। वहीं पीड़ित पक्ष के वकील ने तर्क दिया था कि आरोपी स्वयं वित्तीय लेनदेन को स्वीकार कर रहा है। आत्महत्या आरोपी की फैक्टरी परिसर में हुई और सुसाइड नोट, सीसीटीवी व कॉल डिटेल रिकॉर्ड जैसे साक्ष्य मौजूद हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।