संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। हरियाणा के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कैप्टन अजय सिंह यादव मंगलवार को लघु सचिवालय स्थित धरना स्थल पर पहुंचे। जहां जिला बार एसोसिएशन एसडीएम के खिलाफ धरने पर बैठा है। इस दौरान उन्होंने वकीलों की मांगों को जायज बताते हुए अपना समर्थन दिया। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नाम ज्ञापन कैप्टन अजय सिंह यादव को सौंपा। कैप्टन अजय सिंह यादव ने जिला उपायुक्त से दूरभाष पर बातचीत कर अधिवक्ताओं की शिकायतों पर शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की। इसके बाद छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी कैप्टन अजय सिंह यादव को ज्ञापन सौंपकर लगातार हो रहे पेपर लीक, परीक्षाओं के रद्द होने और युवाओं के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर हस्तक्षेप की मांग की।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए कैप्टन अजय सिंह यादव ने कहा कि आज देश का युवा सबसे अधिक असुरक्षित महसूस कर रहा है। वर्षों की मेहनत और लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी युवाओं को निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था नहीं मिल रही। पिछले कुछ वर्षों में देशभर में दर्जनों भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं और कई महत्वपूर्ण परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी हैं।
नीट यूजी और यूजीसी नेट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं पर भी सवाल खड़े हुए, जबकि विभिन्न राज्यों में पुलिस भर्ती, शिक्षक भर्ती और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि जब बार-बार ऐसी घटनाएं हो रही हैं तो इसकी नैतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
कैप्टन अजय सिंह यादव ने मांग की कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तत्काल इस्तीफा दें। उन्होंने कहा कि जिन निर्दोष विद्यार्थियों ने इस भ्रष्ट और असफल व्यवस्था से निराश होकर आत्महत्या जैसा कदम उठाया है, उनके परिवारों को सम्मानजनक आर्थिक मुआवजा दिया जाए और पेपर लीक माफिया और उनके संरक्षकों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
उन्होंने जंतर-मंतर पर अपने भविष्य की लड़ाई लड़ रहे छात्रों पर किए गए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े जाने की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की आत्मा पर हमला है। छात्रों की आवाज सुनने के बजाय उन्हें बलपूर्वक दबाना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के लिए शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक के साथ किया गया व्यवहार भी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों के साथ इस प्रकार का रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।