रेवाड़ी। कृषि महाविद्यालय बावल में विद्यार्थियों को संबोधित करते मुख्यातिथि। स्त्रोत : महाविद्य
बावल। कृषि महाविद्यालय बावल में हिंदू नववर्ष प्रतिपदा के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने सभागार को फूलों से सजाया। प्रथम वर्ष की छात्रा नीरज और इशिका ने मंच संचालन किया। कल्पना, योगेश और करण ने कविता से और छात्रा हर्षल ने भाषण से वाहवाही लूटी।
मुख्यातिथि के रूप में क्षेत्रीय निदेशक डॉ. धर्मबीर यादव ने कहा कि देश की सांस्कृतिक विरासत समृद्ध रही है। जहां विश्व में नया वर्ष एक जनवरी को मनाया जाता है, वहीं हिंदू परंपरा के अनुसार नववर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आरंभ होता है। इस समय जहां शीत ऋतु समापन होकर ग्रीष्म ऋतु का आगमन हो होता है। बसंत ऋतु के कारण प्रकृति नए रूप में दिखती है। पेड़ों पर नई कोंपले आ रही होती हैं। पौधों पर रंग बिरंगे फूल महक रहे होते हैं।
महाविद्यालय के प्रिंसिपल प्रो. नरेश कौशिक ने बताया कि भारतीय संस्कृति में इस दिन का बहुत महत्व है। डॉ. प्रशांत चौहान ने हिंदू नव वर्ष की बधाई देते हुए सभी का धन्यवाद किया। इस अवसर पर डॉ. जितेंद्र यादव, डॉ. सुनीता श्योराण, डॉ. नवीश कंबोज, डॉ. राधेश्याम मांझू व अन्य मौजूद रहे।