रेवाड़ी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विकास गुप्ता की अदालत ने गांव भाड़ावास निवासी आरोपी दीपक की अंतरिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। हालांकि अदालत ने मानवीय आधार पर उसे कड़ी सुरक्षा के बीच बहन की शादी में शामिल होने की एक दिवसीय अनुमति दी है। वहीं मामले में नियमित जमानत याचिका पहले ही हाईकोर्ट द्वारा खारिज की जा चुकी है।
दीपक की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि 10 दिसंबर को उसकी बहन की शादी है। पिता के निधन के बाद दीपक ही परिवार में एकमात्र भाई है और परंपरागत रस्मों को निभाना उसकी जिम्मेदारी है। इसी आधार पर अदालत से अंतरिम जमानत की मांग की गई।
राज्य पक्ष की तरफ से पेश अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी गंभीर मामले में नामजद है, नियमित जमानत भी हाईकोर्ट में खारिज हो चुकी है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पाया कि विवाह का तथ्य पुलिस द्वारा भी स्वीकार किया गया है। अदालत ने कहा कि आरोपित पर गंभीर धाराएं लागू हैं और उसे अंतरिम जमानत देना उचित नहीं होगा।
हालांकि मानवीय आधार पर अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपी को 10 दिसंबर को दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक उसकी बहन की शादी में शामिल होने के लिए ले जाएं व कार्यक्रम समाप्त होते ही उसी दिन शाम को वापस जेल में दाखिल किया जाए। सुरक्षा का खर्च आरोपी को स्वयं वहन करना होगा।
यह था पूरा मामला
दीपक पर थाना रामपुरा में शिकायतकर्ता आदेश ने 7 फरवरी को एफआईआर दर्ज करवाई थी। उसने बताया था कि वह अपने खेत में जा रहा था। रास्ते में आरोपी दीपक ने साथी के साथ मिलकर स्कूटी से रास्ता रोका और जेब से रुपये निकाल लिए। सिर व हाथ पर लोहे की रॉड से वार किए।