रेवाड़ी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नरेंद्र पाल की अदालत ने सेना में नौकरी दिलाने के नाम पर 5.65 लाख रुपये ठगने के आरोपी अजय कुमार की नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।
आरोपी के अधिवक्ता ने दलील दी कि उसके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया है। पुलिस यह साबित नहीं कर पाई कि पैसा सीधे उसके खाते में जमा हुआ है। ट्रायल लंबा खींच सकता है, ऐसे में आरोपी को जमानत मिलनी चाहिए।
सरकारी अधिवक्ता ने दलील दी कि अजय धोखाधड़ी का मुख्य आरोपी है। उसने शिकायतकर्ता से ठगी कर रुपये हड़पे और फर्जी दस्तावेज तैयार कराए। अगर आरोपी को जमानत दी जाती है तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि आरोपी पर गंभीर आरोप लगे हैं। ट्रायल अभी शुरू नहीं हुआ है और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में जमानत देना उचित नहीं है। अदालत ने आरोपी अजय की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दिया।
सितंबर 2023 में दी थी शिकायत
अभय सिंह ने कसोला थाने में सितंबर 2023 में दी गई शिकायत में कहा था कि उनका बेटा डिफेंस अकादमी में कोचिंग ले रहा था, जहां उसकी मुलाकात अजय से हुई। कुछ समय बाद अजय ने बेटे को झांसा दिया कि उसका चयन सेना में हो गया है और उसने सेना के अधिकारियों से अच्छे संबंध बना लिए हैं। वह पैसे लेकर उसे भी सेना में नौकरी दिला सकता है। अजय ने नौकरी दिलाने के नाम पर 5 लाख, दस्तावेज तैयार करने के लिए 25 हजार और सत्यापन के लिए 40 हजार की मांग की। इस तरह कुल 5.65 लाख विभिन्न खातों में उसने जमा करवाए। इसके बाद सिकंदराबाद बुलाकर फर्जी शारीरिक परीक्षा का कॉल किया गया। बाद में पता चला कि अजय ने उनके साथ ठगी की है। पुलिस ने आरोपी द्वारा तैयार किए गए फर्जी प्रमाणपत्र और खेल संबंधी दस्तावेज भी बरामद किए थे।