रेवाड़ी। दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर शनिवार शाम आए तेज अंधड़ के चलते कृषि कानूनों के खिलाफ धरना दे रहे किसानों के अधिकतर टेंट उखड़ गए। किसानों को टेंट से बाहर निकलने मौका तक नहीं मिला। इससे अनेक किसान गंभीर रूप से घायल हो गए, घायल किसानों को राजस्थान के नीमराना व बहरोड के अस्पतालों में पहुंचाया गया। सभी उपचाराधीन किसानों की हालत खतरे से बाहर है। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर खेड़ा बॉर्डर पर 167 दिनों से हरियाणा व पंजाब के कृषि कानूनों को रद्द करवाने की मांग को लेकर हाईवे के बीच में बैठे हुए हैं।
तूफान व बारिश से मोर्चे पर भारी नुकसान
खेड़ा बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा के प्रवक्ता संजय माधव ने बताया कि शनिवार को करीब साढ़े 6 बजे आए तूफान से भारी नुकसान हुआ है। अधिकतर टेंट उखड़ने के साथ ही अस्त-वयस्त हो गए। घायल किसानों में गणपत राम, भगत सिंह, रामप्रसाद सहित करीब 10 किसान हैं। इनके सिट में चोट से लेकर हाथ पैरों पर भी गंभीर चोटें आई हैं। माधव का कहना है कि बावजूद इसके किसानों का हौसला नहीं टूटा है। देर रात एक बार फिर से किसान अपने टेंट को खड़ा करने में लगे रहे। इससे पहले भी तेज तूफान में किसानों को अधिकतर टेंट फट चुके हैं, लेकिन इस बार चोट लगना चिंता का विषय है।