संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। शीतकालीन अवकाश में बच्चों को लिखने और रटने की अपेक्षा गृहकार्य में अनुभव आधारित शिक्षा प्राप्त करने पर जोर दिया गया है। इसमें अभिभावकों की अहम भूमिका है। अवकाश के बाद शिक्षक बच्चों से पूछेंगे कि उन्होंने अभिभावकों से क्या सीखा और अभिभावकों ने गृह कार्य पूरा कराने में कितनी मदद की।
स्कूल में शीतकालीन अवकाश 15 जनवरी तक है। अवकाश के बाद स्कूल पहुंचे बच्चों से शिक्षक यह जानने की कोशिश करेंगे कि अनुभव के आधार बच्चों ने क्या सीखा। शिक्षक गृह कार्य को लेकर रिपोर्ट तैयार करेंगे और अभिभावकों को इसकी जानकारी देंगे। ताकि अभिभावकों को भी पता लग सके कि उन्होंने बच्चों को किस हद तक सिखाया। होमवर्क परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर किया जाना है। इसमें नाना-नानी, दादा-दादी मेंटर की भूमिका में रहेंगे। वह अनुभवों के साथ नई पीढ़ी को संस्कार मार्गदर्शन, दक्षता, कौशल, व्यवहार व कुशलता प्रदान करेंगे। अवकाश के दौरान अभिभावक बच्चों को सुबह जल्दी उठाकर उन्हें 10 मिनट ध्यान लगाने का प्रशिक्षण देंगे। बच्चों को सामाजिक व धार्मिक आयोजनों में शामिल करवाएंगे। पौधे लगाने और उनका रखरखाव करने के बारे में बताएंगे। बच्चों को सोने से पहले कहानियां सुनाएंगे। अनुशासन के साथ सही और गलत का अंतर समझाएंगे। बच्चों को मोबाइल और टेलीविजन से दूर रखेंगे।