रेवाड़ी। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के तत्वावधान में डायट हुसैनपुर में चल रहा ड्राइंग अध्यापकों और ललित कला प्राध्यापकों का पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हो गया। प्रशिक्षण में जिले के 43 ड्राइंग अध्यापकों और 14 ललित कला प्राध्यापकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में प्रशिक्षकों ने कैनवास पर धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक सौंदर्य को उकेर कर अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। डायट में ट्रेनिंग विंग प्रभारी वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. बीर सिंह ने कहा कि कला एक ऐसा विषय है, जो हर विषय में किसी न किसी रूप में समाहित रहता है।
नई शिक्षा नीति-2020 में भारतीय कला और संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन पर विशेष बल दिया है। इस तरह के प्रशिक्षण शिक्षकों की सृजनात्मकता को बढ़ाते हैं और विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति को नए आयाम देते हैं। वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. सरोज यादव व डॉ. विजय सिंह ने भी प्रशिक्षण के महत्व पर अपने विचार रखे।
प्रशिक्षण कार्यशाला में सैद्धांतिक सत्रों के साथ व्यावहारिक अभ्यास पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रशिक्षुओं को दृश्य कला की विभिन्न विधाएं, वाटर कलर, एक्रेलिक कलर, ऑयल पेस्टल जैसी पेंटिंग तकनीकें, रेजिन आर्ट, वेस्ट मैटीरियल से कला कृतियां तैयार करने, मूर्ति कला, रंगोली और पदार्थ चित्रण की बारीकियां सिखाई गईं।
अंतिम दिन सभी प्रतिभागियों की कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई, जिसे देखकर सभी दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे। कार्यक्रम में एससीईआरटी हरियाणा से प्रशिक्षित विभिन्न विषयों के मास्टर ट्रेनर मौजूद रहे। इसमें अंग्रेजी विषय से प्राध्यापक रमेश कुमार व बबीता यादव (डाइट हुसैनपुर), ललित कला से प्राध्यापक जितेंद्र शर्मा (गढ़ी बोलनी) व भावना (मसानी स्कूल) शामिल रहे।
ड्राइंग विषय से अध्यापक भूपेंद्र कुमार (डूंगरवास) व अजीत सिंह (आसलवास), पीजीटी अंग्रेजी से प्राध्यापक दिनेश शर्मा (बावल) व पवन कुमारी (साल्हावास) शामिल रहे। डायट के विषय विशेषज्ञ प्राध्यापक सतपाल, अशोक यादव, हवा सिंह व डॉ. संगीता ने जेनेरिक विषयों पर प्रशिक्षण दिया। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक, रचनात्मक बताया।