रेवाड़ी। शहर के विकास नगर कॉलोनी में रहने वाली तमन्ना शर्मा दो साल पहले एक बीमारी में आंखों की रोशनी खो देने के बाद भी हार नहीं मानी। 8 माह पहले ही परिचित के माध्यम से शहर के राव तुलाराम स्टेडियम में पैरा कोच टेकचंद के मार्गदर्शन में अभ्यास शुरू किया। पहले ही पैरा नेशनल चैंपियनशिप में एफ-11 कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीता। यह चैंपियनशिप इसी साल जनवरी में गोवा में आयोजित हुआ था।
तमन्ना अब डिस्कस थ्रो पैरा खेल में ओलंपिक में पदक जीतने की तैयारी कर रही है। तमन्ना ने बताया कि उन्होंने एमसीए किया है। बीमारी से पहले एक स्कूल में बतौर कंप्यूटर शिक्षिका कार्यरत थी। बीमारी के बाद एक साल बिस्तर पर रही। उस समय ऐसा लगा कि सब कुछ खत्म गया है। अचानक उजाले से अंधेरे में चली गई, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। पिता रमेशचंद शर्मा और माता कमलेश देवी के साथ ही सभी परिजनों ने पूरा साथ दिया। तमन्ना ने बताया कि पैरा कोच और ओलिंपियन टेकचंद के मार्गदर्शन में अब वे डिस्कस थ्रो की तैयारी में भी जुटेगी। उसका सपना पैरा खेल में ओलंपिक में पदक जीतना है।
तमन्ना ने बताया कि नवंबर 2021 से पहले सब कुछ ठीक चल रहा था। अचानक से बीमार हो गई और टीबीएम (ट्यूबरकुलस मेंजाइटी) रोग हो गया। इसमें ब्रेन में बुखार आ गया। रेवाड़ी से लेकर गुरुग्राम, दिल्ली एम्स व जयपुर एसएमएस तक में इलाज कराया, लेकिन सुधार नहीं हो सका। धीरे-धीरे आंखों की रोशनी चली गई। एम्स दिल्ली में भी विशेषज्ञों ने बताया कि अब आंखों की रोशनी वापस नहीं आ सकती। क्योंकि नर्व डैमेज हो गया है। उस समय लगा कि सब कुछ खत्म हो गया।
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मां के साथ गई राव तुलाराम स्टेडियम
तमन्ना के मुताबिक उस समय एक परिचित के माध्यम से पता लगा कि शहर के राव तुलाराम स्टेडियम में पैरा खिलाड़ियों को खेलों का अभ्यास कराया जाता है। बस उसी दिन अपनी मां को साथ लेकर राव तुलाराम स्टेडियम में पहुंच गई। वहां पैरा कोच टेकचंद से मिली। उसके बाद से हर रोज माता स्टेडियम में लेकर जाती हैं। वहां पर कोच टेकचंद के साथ ही अन्य सदस्य भी मदद करते हैं। लगभग 8 माह से ही प्रैक्टिस करते हुए हैं और अपने पहले ही पैरा नेशनल इवेंट में शॉटपुट में 7 मीटर गोला फेंककर ब्रॉन्ज मेडल जीता है।