रेवाड़ी। सरकारी स्कूल के भवन को लीज पर लेने वाली एक संस्था एक बार फिर विवादों में आ गई। संस्था से मुश्किल से बाहर निकलने वाली छात्राओं में से एक ने आपबीती सुनाई तो यह साफ हो गया कि संस्था के बच्चों के साथ कैदियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। बच्ची ने बताया कि अभिभावकों के साथ तभी उसकी बात कराई गई, जब उसने आत्महत्या की चेतावनी दी। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद बच्चियों को संस्था से बाहर निकाला गया।
कैथल जिले की रहने वाली बच्चियों के अभिभावक वीरवार को बच्चियों से मिलने के लिए आए थे, लेकिन संस्था के संचालक ने उन्हें बच्चियों से मिलने की अनुमति नहीं दी। दोपहर बाद तक बच्ची का पिता अधिकारियों के पास अपनी बच्ची से मिलने की परमिशन दिलाने के लिए चक्कर लगाता रहा, परंतु अधिकारियों की ओर से भी उसकी कोई मदद नहीं की गई। पूर्व विधायक रणधीर सिंह कापड़ीवास को जब इस बात की जानकारी मिली तो वह खुद मौके पर पहुंच गए। उन्होंने भी प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया, परंतु अधिकारियों ने बैठक में होने की बात कहते हुए पल्ला झाड़ लिया। आखिरकार जब कापड़ीवास ने एसपी से संपर्क करते हुए उन्हें मामले के बारे में बताया तो एसपी दीपक सहारण ने एसएचओ को मामले में तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके बाद संस्था पहुंची पुलिस ने दो बच्चियों को उनके अभिभावक को सुपुर्द किया। इसके बाद दोनों बच्चियां अपने अभिभावकों के साथ चली गईं। उन्होंने बताया कि कई बच्चियां संस्था में रहने को खुश नहीं हैं, लेकिन उनके परिजनों से बात तक नहीं कराई जा रही।
आत्महत्या की चेेतावनी के बाद पिता से कराई बात
एक बच्ची ने बताया कि प्रवेश के बाद से ही वह यहां रहने लगी थी। यहां 400 बच्चियों को नहाने के लिए सिर्फ 4 बाथरूम हैं। स्नान करने के लिए इंतजार करना पड़ता है। खाना तक सही नहीं मिलता है। उसने मामले की शिकायत अपनी शिक्षिका से की तो उसने अअभिभावक से बात कराने के लिए मना कर दिया। वह लगातार गिड़गिड़ाती रही। सस्था संचालक के पैर पकड़कर अभिभावकों से बात कराने की गुहार लगाई तो भी उसकी बात नहीं कराई। जब उसने चेतावनी दी कि अगर उसके पिता से बात नहीं कराई गई तो वह आत्महत्या कर लेगी। इसके बाद उसके पिता से बात कराई गई।