रेवाड़ी। त्योहारी सीजन मिठाइयों की मांग बढ़ने के साथ ही इसकी बिक्री में भी बेहिसाब इजाफा होता है। दीपावली पर भी बड़ी संख्या में मिठाइयों की बिक्री होगी। ऐसे में लोग गुणवत्ता वाली मिठाइयां खरीद सकें, इसके लिए जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी रेवाड़ी राजेश वर्मा ने मिठाइयों की गुणवत्ता को लेकर लोगों को जागरूक किया है। यह भी कहा कि मिठाइयों की जांच की जा रही है।
पिछले वर्ष फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने नोटिफिकेशन जारी कर मिठाइयों पर बेस्ट बिफोर डेट का टैग लगाने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया था। इसकी वजह से लोगों में बासी मिठाइयों को लेकर संशय बना रहता है। फूड सेफ्टी ऑफिसर राजेश वर्मा ने बताया कि बेस्ट बिफोर के बाद भी मिठाइयों को खाया जा सकता है लेकिन उनकी गुणवत्ता में कमी आ जाती है।
उन्होंने बताया कि दूध से बनी मिठाइयां 2 दिन, मावे से बनी मिठाइयों की लाइफ 4 दिन और ड्राई फ्रूट से बनी मिठाइयां 7 दिन तक चलती हैं। वहीं घर पर अच्छी सामग्री से निर्मित लड्डू और मिठाइयों को 2 सप्ताह के समय तक भी आसानी से उपयोग किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि किसी भी मिठाई को बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री, उसके अंदर नमी की मात्रा, वातावरण, मिठाइयों को स्टोर के तरीके से मिठाई की गुणवत्ता तय होती है। इन सभी चीजों से ही को ध्यान में रखकर और दूकानदार मिठाई के बनने की तारीख को पूछकर मिठाई की खरीदारी करनी चाहिए।
घी व ड्राई फ्रूट से बनी हुई मिठाइयां 7 दिन तक चलती हैं। बेसन, मोतीचूर, ड्राई फ्रूट के लड्डू, खजूर की बर्फी, पंजीरी लड्डू, अंजीर ड्राई लड्डू, खजूर मेवा लड्डू, अंजीर मेवा लड्डू, काजू ड्राई फ्रूट काजू कतली, घेवर, शक्कर पाया, गुड़ पारा, शाही लड्डू, मूंग बर्फी, आटा लड्डू, ड्राई फ्रूट गुजिया, बूंदी लड्डू, काजू केसर बर्फी, बालूशाही, बादाम बर्फी, केसर गुजिया, मैदा गुजिया, काजू लड्डू, बेसन बर्फी सात दिन तक चलती है।
मावे से बनी मिठाई 4 दिन पुरानी है तो ना खाएं
त्योहारी सीजन में मावे की मिठाई की सबसे ज्यादा मांग रहती है। इनकी लाइफ 4 दिन तक होती है। इनमें मावा कतली, रसगुल्ला, गुलाब जामुन, मावे की बर्फी, मावा जलेबी, मिल्क केक, पेड़ा, प्लेन बर्फी, मिल्क बर्फी, पिस्ता बर्फी, कोकोनट बर्फी, चॉकलेट बर्फी, सफेद पेड़ा, बूंदी लड्डू, मोतीचूर मोदक, खोया बादाम, मलाई घेवर और अन्य मिठाइयां शामिल हैं। अगर ये मिठाइयां चार दिन पुरानी हैं तो ये नहीं खानी चाहिए। कलाकंद एक दिन और दूध से बनी मिठाइयां 2 दिन तक चलती हैं। मिठाई खरीदें तो दुकानदार से निर्माण की तारीख जरूर पूछे। कई दिन पहले बनीं मिठाइयोें खटास आ जाती है जो बीमार भी कर सकती है। ऐसी मिठाइयों में मलाई बर्फी, दूध पाक, मिल्क बादाम, रसमलाई, रबड़ी रसमलाई, राजभोग, मलाई रोल, गुड़ रसमलाई, गुड़ रबड़ी, छेना, चमचम शामिल हैं। आटा लड्डू, बेसन लड्डू, अंजीर खजूर बर्फी, गजक, चिक्की, पेठे की मिठाई दो हफ्ते चलती है।
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वर्जन:
जिले में समय-समय पर खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग की जाती है। लोगों को दुकानदार से मिठाई बनाने की तारीख पूछकर ही उसकी खरीदारी करनी चाहिए। किसी तरह गड़बड़ी लगे तो लोग एफएसएसएआई के नंबर, वेबसाइट पर या विभाग में लिखित शिकायत दे सकते हैं।-राजेश वर्मा, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी, रेवाड़ी