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शनिवार को समर्थन मूल्य पर नहीं बिका बाजरा

Sun, 02 Oct 2016 12:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
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आनाज मंडी में पड़ा बाजरा
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सरकारी एजेंसी हैफेड की ओर से शनिवार को समर्थन मूल्य 1330 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बाजरे की खरीद शुरू होनी थी, लेकिन स्थानीय आढ़तियों के विरोध के बाद खरीद शुरू नहीं हो पाई। सरकारी खरीद के लिहाज से किसान भी अन्य दिनों की तुलना में भारी मात्रा में बाजरा लेकर मंडी पहुंचे थे। आढ़तियों ने सरकारी खरीद के लिए निर्धारित नियम व शर्तों को किसान विरोधी बताते हुए खरीद करवाने से इनकार कर दिया। जिसके चलते किसानो ने औने-पौने दामों में ओपन बोली के तहत अपना  बाजरा 1250 से 1295 रुपए प्रति क्विंटल तक बाजरा बेच दिया।
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 आढ़तियों ने बताया कि एक एकड़ पर 4 क्विंटल की खरीद, 14 प्रतिशत नमी से अधिक नहीं होना, काला दाना नहीं होना, फर्द साथ लाना जैसी जटिल शर्तों के चलते खरीद संभव नहीं थी, इसमें किसानो को सिवाय परेशानी के कुछ नहीं मिलना है। वहीं अब हैफेड के पास अपनी को-ऑपरेटिव सोसायटी के माध्यम से सरकारी खरीद शुरू करने का ही विकल्प बचता है। हालांकि अधिकारियों का कहना है आला अधिकारियों से बातचीत कर सोमवार को खरीद शुरू की जाएगी। इस पर चुटकी लेते हुए व्यापार मंडल एसोसिएशन के प्रधान राधेश्याम मित्तल ने कहा कि किसी का बेटा यदि काला है, तो क्या उसका ब्याह नहीं होगा।

आवक अधिक तो खरीद नहीं:
सरकारी खरीद की आस लगाए बैठे किसानों को सिवाय निराशा के कुछ भी हाथ नहीं लगा। पहले ही जिले के अधिकतर किसान सस्ते दामों में अपना बाजरा मंडी में बेच चुके हैं। बावजूद इसके मंडी में बाजरे की अभी भी भारी आवक है। वर्तमान में बाजरा लेकर मंडी पहुंच रहे किसानो को भी समर्थन मूल्य का लाभ मिलता नहीं दिख रहा है। सरकारी खरीद में हैफेड की जटिल शर्तें बड़ा रोड़ा बनी हुई हैं। ऐसे पचड़े में पड़ने  की बजाय किसान भी दो पैसे कम में अपनी फसल बेचकर निकल रहे हैं। मंडी प्रशासन की माने तो अभी तक 84400 क्विंटल बाजरे की खरीद हो चुकी है। सोमवार को लगभग 6 हजार क्विंटल बाजरे की खरीद की गई। वहीं गत वर्ष सितंबर माह में केवल 55 हजार क्विंटल केे लगभग खरीद हुई थी।
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सरकारी खरीद एक ड्रामा:
आढ़ती एसोसिएशन प्रधान राधेश्याम मित्तल ने कहा कि सरकारी खरीद एक ड्रामा है। जिन नियम और शर्तों के साथ हैफेड बाजरे की खरीद करना चाहती है, वह कभी मुमकिन ही नहीं हो सकता है। उन्होंने बताया यदि एक किसान एक एकड़ का 6 क्विंटल बाजरा लेकर आता है, तो एजेंसी केवल 4 क्विंटल ही खरीद करेगी। ऐसे में 2 क्विंटल बाजरा किसान कहां लेकर जाएगा। उन्होंने कहा कि एजेंसी ये सारी नियम व शर्तें हटाकर एक मुश्त किसानों का अनाज खरीदे, ताकि सभी किसानो को समर्थन मूल्य का लाभ मिल पाए तथा आढ़तियों की भी फजीयत कम हो।
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समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए मैंने पहले अपना बाजरा नहीं बेचा, लेकिन यहां आकर पता चलता कि खरीद ही नहीं हो रही है, जिसके चलते मैंने ओपन बोली में अपना बाजरा 1256 रुपए प्रति क्विंटल बेच दिया।
जगदीश कुमार, किसान, बगथला
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मेरा बाजरा सरकारी खरीद के नियमों के अनुसार बिल्कुल सूखा व गुणवत्ता वाला था, लेकिन यहंा खरीद ही नहीं हुई। ऐसे में मैंने सस्ते दामों में बाजरा बेच दिया।
अनिल कुमार, सुर्खपुर
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समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए इतनी सारी शर्तें लगा देना, खरीद नहीं करने का बहाना है। अब हर किसी का बाजरा तो शर्तों पर खरा नहीं उतरता, तो क्या वे किसान अपना बाजरा बेचने के हकदार नहीं है।
अजीत कुमार, सुर्खपुर
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इस बार बाजरे की अच्छी आवक है व बाजरा भी उत्तम किस्म का है। बावजूद इसके सरकारी एजेंसी समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए कोताही बरत रही है। ऐसे में बेस्ट क्वालिटी का बाजरा भी ओने-पौने दामों में बिक रहा है।
राकेश, किसान, सुर्खपुर
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हम सरकार के दिशा-निर्देशानुसार अनाजमंडी में समर्थन मूल्य पर बाजरे की खरीद करने गए थे, लेकिन आढ़तियों ने निर्धारित शर्तों के साथ बाजरे की खरीद में सहयोग करने से मना कर दिया, जिसके चलते शनिवार को खरीद नहीं हो पाई। अब हम सोमवार को आला अधिकारियों से बातचीत करने के बाद अनाजमंडी में खरीद के लिए जाएंगे।
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रामकुमार, डीएम, हैफेड
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