रेवाड़ी। पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव का टिकट कटने के बाद हर कोई आश्चर्यचकित है। खुद कांग्रेस के कार्यकर्ताओं व समर्थकों को भी यकीन नहीं हो रहा है। टिकट कटने की वजह से कार्यकर्ताओं व समर्थकों में काफी रोष है। वीरवार को पार्टी कार्यकर्ताओं व समर्थकों के साथ हुई बैठक में भी नाराजगी देखने को मिली। अब समर्थकों का सवाल है कि आखिर पांच साल लगातार मेहनत करने के बाद भी कैप्टन अजय यादव को टिकट क्यों नहीं मिला। खुद कैप्टन अजय यादव के बेटे और मौजूदा सांसद विधायक चिरंजीव राव भी इन सवालों का जवाब ढूंढ रहे हैं। कैप्टन अजय यादव गुरुग्राम लोकसभा सीट के कांग्रेस के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे।
कैप्टन अजय यादव ने 5 सालों में करीब 400 गांवों का दौरा किया था और जनता के बीच जाकर प्रचार किया। उसके बावजूद उन्हें टिकट नहीं मिला। समर्थक धर्मवीर और गूगन ने बताया कि जो नेता पांच साल तक लगातार जनता के बीच में रहे और एकदम से टिकट कट जाए तो दुख होता ही है। टिकट कटना उचित नहीं है, अगर राव इंद्रजीत को कोई टक्कर दे सकता है तो वह केवल कैप्टन अजय यादव ही थे।
वोट मिलने के मामले में दूसरे नंबर पर थे कैप्टन अजय यादव
कैप्टन अजय यादव का टिकट कटने के कई कारण बताए जा रहे हैं। बीच-बीच में पार्टी के खिलाफ भी बयानबाजी भी इसका एक कारण हो सकता है। चिरंजीव राव ने बताया कि उनके पिता ने पिछला चुनाव लड़ा और 4 लाख 95 हजार वोट मिले। कैप्टन अजय सिंह यादव ने पूरे हरियाणा में दूसरे नंबर पर सबसे अधिक वोट हासिल किए थे।
छह बार विधायक रह चुके
कैप्टन अजय ने अपना पहला चुनाव 1989 में रेवाड़ी सीट से लड़ा था। उसके बाद वह लगातार 6 बार 2014 तक विधायक रहे। हालांकि, मोदी लहर में कैप्टन 2014 का विधानसभा चुनाव हार गए। इस दौरान कैप्टन अजय यादव सीएलपी लीडर, वित्त मंत्री सहित कई बड़े ओहदे पर रहे। 2019 के चुनाव लोकसभा चुनाव में कैप्टन ने खुद गुरुग्राम सीट से लोकसभा चुनाव तो बेटे चिरंजीव राव को रेवाड़ी सीट से चुनाव लड़ाया। चिरंजीव राव ने कांटे के मुकाबले में भाजपा उम्मीदवार सुनील मुसेपुर को हरा दिया था।
पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा से नहीं रही दोस्ती
कैप्टन की लंबी राजनीतिक पारी में उनकी पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और चौधरी भजनलाल से दोस्ती कुछ खास नहीं रही। दोनों ही पूर्व सीएम की सरकार में मंत्री जरूर रहे, लेकिन किन्हीं कारणों से अनबन बनी रही। कैप्टन यादव ने हुड्डा से खटपट के चलते 2014 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मंत्री पद से इस्तीफा तक देने का एलान कर दिया था। हालांकि, उसके बाद कैप्टन को मना लिया गया। कैप्टन और हुड्डा के बीच 36 का आंकड़ा रहा। अब कुछ समय से कैप्टन और हुड्डा के बीच रिश्तों में मिठास आने लगी थी, लेकिन अब उनका लोकसभा चुनाव का टिकट कट गया।