कार्यक्रम में किसानों को जागरूक करते विशेषज्ञ। स्त्रोत: विभाग
रेवाड़ी। गांव बासदूदा में ग्वार की फसल में लगने वाले झुलसा रोग की रोकथाम तथा भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में ग्वार के योगदान को लेकर किसान गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के पूर्व निदेशक डॉ. एचडी यादव मुख्य अतिथि रहे।
डॉ. एचडी यादव ने कहा कि इस वर्ष ग्वार का क्षेत्र बढ़ने का प्रमुख कारण किसानों में जागरूकता बढ़ना है। लगातार बाजरा उगाने से खेत की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। इसका असर रबी फसलों की पैदावार पर भी पड़ता है। ग्वार दलहनी फसल होने के कारण हवा की नाइट्रोजन को भूमि में बढ़ाती है। फसल के पत्ते खेत में गिरकर जैविक कार्बन बढ़ाते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति में सुधार होता है।
ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव ने किसानों को झुलसा रोग से बचाव की जानकारी देते हुए कहा कि रोग की रोकथाम समय रहते करना जरूरी है। उन्होंने प्रति एकड़ स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 30 ग्राम तथा कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत 400 ग्राम का घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी। इसी घोल में रोगोर दो मिलीलीटर प्रति लीटर मिलाकर 15 दिन बाद दूसरा छिड़काव करने की जानकारी दी।
खंड कृषि अधिकारी डॉ. मनोज कुमार यादव ने किसानों को मेरी फसल मेरा ब्योरा, फसल बीमा और प्रधानमंत्री किसान निधि सहित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सब्सिडी का लाभ लेने के लिए पोर्टल पर पंजीकरण आवश्यक है। इस दौरान किसानों को स्ट्रेप्टोसाइक्लिन के दो-दो पाउच भी वितरित किए गए। सरपंच धर्मवीर यादव ने सभी का आभार जताया। आयोजन में पंच राजेंद्र सिंह का विशेष योगदान रहा।