जिले के राजकीय विद्यालयों में साल दर साल घट रही छात्र संख्या अब शिक्षा विभाग के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। तमाम प्रयासों के बावजूद सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या लगातार कम हो रही है। हालात यह हैं कि एक ही वर्ष में 11 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूलों से दूरी बना ली है।
ये 9 साल का सबसे खराब रिकॉर्ड है। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पहले शिक्षकों ने घर-घर जाकर अभिभावकों को सरकारी स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जागरूक किया। इसके साथ ही प्रवेश उत्सव अभियान के तहत भी बच्चों को दाखिला दिलाने के लिए विशेष प्रयास किए गए।
बावजूद इसके, इन प्रयासों का अपेक्षित असर नहीं दिखा और छात्र संख्या में बढ़ोतरी नहीं हो सकी। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में जिले के 693 सरकारी विद्यालयों में कुल 56,910 विद्यार्थी नामांकित थे। वहीं सत्र 2026-27 में यह संख्या घटकर 45,337 रह गई है। यानी महज एक वर्ष में ही 11,573 विद्यार्थियों की कमी दर्ज की गई है।
कई वर्षों से गिरावट लगातार जारी
अगर पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह गिरावट लगातार जारी है। सत्र 2017-18 में जिले के सरकारी स्कूलों में करीब 65 हजार विद्यार्थी थे। सत्र 2018-19 में इसमें 1,238 की कमी आई जबकि 2019-20 में यह संख्या घटकर लगभग 62 हजार रह गई। सत्र 2020-21 में मामूली सुधार जरूर देखा गया लेकिन इसके बाद भी स्थायी बढ़ोतरी नहीं हो सकी। सत्र 2021 से 2023 के बीच संख्या करीब 70 हजार के आसपास रही लेकिन इसके बाद गिरावट शुरू हो गई। सत्र 2024-25 में 58,253 विद्यार्थियों का नामांकन हुआ था जो अब तेजी से घटा है।
शिक्षा विभाग के सामने बड़ी चुनौती
शिक्षा विभाग के सामने अब चुनौती यह है कि सरकारी स्कूलों में भरोसा कैसे बढ़ाया जाए और विद्यार्थियों की संख्या में फिर से सुधार कैसे लाया जाए। स्थिति को देखते हुए साफ है कि केवल अभियान चलाने से काम नहीं चलेगा बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता, बुनियादी सुविधाओं और परिणामों में ठोस सुधार करना होगा तभी सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की वापसी संभव हो पाएगी।
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जिले में सत्रवार विद्यार्थियों की संख्या
सत्र विद्यार्थी संख्या
2017-1865012
2018-1963774
2019-2062033
2020-2163978
2021-2272286
2022-2371737
2023-2460552
2024-25-58253
2025-2656910
2026-2745337
वर्जन
राजकीय विद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए इस बार शिक्षा विभाग की ओर से हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। गांव-गांव तक जागरूकता अभियान चलाकर अभिभावकों को सरकारी स्कूलों की सुविधाओं और योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। फिलहाल विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया जारी है और शिक्षक लगातार अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों का दाखिला सुनिश्चित करने में जुटे हैं। 10वीं कक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद छात्र संख्या में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। स्कूल मुखियाओं को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी बच्चा बिना दाखिले के न रहे।
-बिजेंद्र हुड्डा, जिला शिक्षा अधिकारी रेवाड़ी