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टैंक में डूबा किशोर, परिजनों ने हंगामा कर शव उठाने से किया इनकार

Fri, 26 May 2017 12:23 AM IST
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धरने पर बैठे ग्रामीणों को मनाने पहुंचे डीएसपी, आश्वासन मिलने के बाद उठाया शव
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खोल/रेवाड़ी।  बांस बिटोड़ी गांव में एक किशोर की पब्लिक हेल्थ के वाटर टैंक में डूबने से मौत हो गई।
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परिजनों ने अस्पताल में वाटर टैंक के कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाकर जमकर हंगामा किया। परिजनों ने आरोप लगाया कि वाटर टैंक पर विभाग के कर्मचारी ड्यूटी पर रहते तो किशोर की जान नहीं जाती।
उन्होंने विभाग के कर्मचारियों पर कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार को मुआवजा दिलाने की मांग कर शव उठाने से इनकार कर दिया। अस्पताल में पहुंचे खोल थाना प्रभारी ने समझाने का प्रयास किया लेकिन ग्रामीण नहीं माने। इसके बाद डीएसपी ने अस्पताल में पहुंचकर धरने पर बैठे परिजनों और ग्रामीणों से बात की। उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया लेकिन ग्रामीण प्रशासनिक अधिकारी को मौके पर बुलाने समेत अन्य मांगों को लेकर अड़े रहे। बाद में डीएसपी के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने किशोर का शव उठाया। किशोर नौवीं कक्षा का छात्र था। वह स्कूल का काम पूरा करने के बाद ही बुधवार दोपहर को खेलने गया था।  
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बांस बिटोड़ी निवासी राहुल बुधवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे स्कूल का काम पूरा करने के बाद खेलने निकल गया। दो घंटे तक जब राहुल घर नहीं पहुंचा तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। इसके बाद भी उसका कोई पता नहीं लगा। देर शाम ग्रामीणों ने बताया कि राहुल की लाश गांव के वाटर टैंक में उतर रही है। खोल पुलिस ने शव को ट्रामा सेंटर पहुंचाया। चिकित्सकों ने जांच के बाद उसको मृत घोषित कर दिया। वीरवार को गांव के लोग बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंचे। उन्होंने पब्लिक हेल्थ कर्मचारी पर मामला दर्ज कराने और परिवार को मुआवजा देने की मांग कर शव उठाने से इनकार कर दिया। काफी देर तक भी किसी अधिकारी के नहीं पहुंचने पर ग्रामीणों ने जमकर बवाल काटा।
ग्रामीण बुधवार रात से ही अस्पताल में बैठे थे। सुबह 11 बजे तक कोई भी डॉक्टर शव का पोस्टमार्टम करने नहीं पहुंचा। ग्रामीण अस्पताल अधिकारियों का चक्कर काटते रहे, बावजूद इसके कोई समाधान नहीं हुआ। अस्पताल में मीडिया के पहुंचने पर आनन-फानन में कार्यकारी सीएमओ डॉ. सुदर्शन पंवार ने मौके पर पहुंचकर डॉक्टर को पोस्टमार्टम करने के लिए भेजा। उधर धरने पर बैठे परिजनों और ग्रामीणों की सुुध लेने कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा। करीब एक बजे खोल थाना प्रभारी बिरेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन ग्रामीण नहीं माने। इसके कुछ देर बाद डीएसपी  मोहम्मद जमाल मौके पर पहुंचे और उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया। ग्रामीण प्रशासनिक अधिकारी को बुलाने की मांग पर अड़ गए। थोड़ी देर बाद डीएसपी के आश्वासन पर ही शव को मोर्चरी से लिया, और करीब साढ़े चार बजे शव का अंतिम संस्कार किया।
होनहार था राहुल
सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले राहुल को कुछ ही दिन पहले टॉप करने पर स्कालरशिप मिली थी। राहुल के पिता सुभाष मजदूरी कर अपने दो बेटों को शिक्षा दिला रहे थे। जैसे ही राहुल के पानी में डूबने की सूचना मिली तो सुभाष और उसकी पत्नी पर पहाड़ टूट पड़ा। दोनों अचेत हो गए। इधर पूर्व पंच सुभाष, जसवंत, जगबीर, कमल सिंह, भीम सिंह, बलवंत सिंह, राजेंद्र, राजेश, महेंद्र सिंह, रमेश कुमार और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि पब्लिक हेल्थ विभाग की तरफ से बनाए वॉटर टैंक पर तीन कर्मचारियों की तैनाती दिखाई है। यहां पर कोई कर्मचारी तैनात नहीं रहता है। इससे पहले भी ग्रामीण विभाग के एसडीओ को इसकी शिकायत कर चुके हैं। बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बुधवार को कोई कर्मचारी वाटर टैंक पर तैनात होता तो एक होनहार बच्चे की जान बच सकती थी। ग्रामीणों में पब्लिक हेल्थ के कर्मचारियों और प्रशासन के खिलाफ गहरा रोष है।
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परिजनों की शिकायत को दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानूनी रूप से कड़ी कार्रवाई  की जाएगी।  - विरेंद्र कुमार, थाना प्रभारी, खोल
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