जिले में पहली बार नेशनल स्तर का एस्ट्रोटर्फ मैदान बनाया जाएगा। इससे जिले के विभिन्न स्टेडियम में हॉकी की प्रैक्टिस कर रहे करीब एक हजार से ज्यादा खिलाड़ियों को नेशनल व इंटरनेशनल स्तर की तैयारी के लिए अन्य जिलों में नहीं जाना पड़ेगा। खेल विभाग ने करीब 7 करोड़ 31 लाख रुपये का बजट दे दिया है। पीडब्ल्यूडी इस मैदान का निर्माण कराएगा।
जिले के हाकी खिलाड़ियों के लिए खुशखबरी है। जिला खेल विभाग द्वारा उसकी स्वीकृति के लिए बजट तैयार कर भेजा जा चुका है। पिछले साल एस्ट्रोटर्फ की मांग विभाग को भेजी गई थी। मार्च तक स्वीकृति मिलने के बाद 2021 में खिलाड़ी एस्ट्रोटर्फ मैदान पर पसीना बहाएंगे। कंवाली के खेल मैदान में हाकी खिलाड़ियों की सुविधा के लिए ग्राम पंचायत और ग्रामीणों ने मिलकर मैदान तैयार करवाया था। उसके बाद जिला खेल विभाग द्वारा खिलाड़ियों के लिए अत्याधुनिक खेल सामान उपलब्ध कराया गया था। इस खेल सामान में कंपोजिट स्टिक, गोलकीपर कीट, बॉल, पोल, गोल पोस्ट व नेट आदि उपलब्ध कराए गए थे।
2019 में भेजा गया था प्रस्ताव
एस्ट्रोटर्फ मैदान की मांग 2019 में विभाग को भेजी गई थी। इसके बाद पीडबल्यूडी से मैदान के लिए बजट तैयार कराया गया। पीडबल्यूडी ने 7 करोड़ 31 लाख का बजट तैयार किया। इसके बाद नवंबर 2019 में वित्तीय स्वीकृति के लिए बजट खेल विभाग को भेजा गया। स्वीकृति से पूर्व खेल विभाग ने सवाल उठाया कि मैदान का रख-रखाव कैसे किया जाएगा।
15 दिन पहले ग्रांम पंचायत ने ली जिम्मेदारी
गांव कंवाली के सरपंच अमित ने बताया कि गांव के मैदान में लगभग 60 सालों से हॉकी खेली जा रही है। एस्ट्रोटर्फ मैदान के रख-रखाव के लिए ग्राम पंचायत ने 15 दिन पहले ही खेल विभाग को लिखित में देखभाल के लिए प्रस्ताव दिया है। सरपंच ने बताया कि पंचायत की तरफ से मैदान के लिए चौकीदार और माली की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा मैदान की सुरक्षा का जिम्मा भी पंचायत का रहेगा। उसके अलावा जिला खेल विभाग और जिला प्रशासन द्वारा भी रख-रखाव किया जाएगा।
मैदान में खेलते हैं 300 खिलाड़ी : कोच
हॉकी कोच विरेंद्र सिंह ने बताया कि मैदान में 7 से 8 गांवों के खिलाड़ी हॉकी सीखते हैं। मैदान में कंवाली, गोठड़ा, डहीना, जैनाबाद, रामपुरी, खेड़ी और झाड़ोदा गांवों के बच्चे आते हैं। आम दिनों में 300 से 350 खिलाड़ी हॉकी खेलते हैं। यहां के खिलाड़ी नेशनल में 1 गोल्ड, 2 सिल्वर, 1 ब्रांज और स्टेट में 1 सिलवर पदक ला चुके हैं। एस्ट्रोटर्फ बनने के बाद खिलाड़ियों के स्किल में सुधार हो सकेगा।
खेल मंत्री के सामने उठाई मांग : डीएसओ परसराम
जिला खेल व युवा कार्यक्रम अधिकारी परसराम ने बताया कि 2 दिसंबर 2019 में कुरुक्षेत्र में प्रदेश के खेल मंत्री संदीप सिंह की अध्यक्षता में आयोजित खेल विभाग की बैठक में कंवाली गांव में एस्ट्रोटफ मैदान की मांग उठाकर प्रस्ताव पास करवाने के मुद्दा उठाया था। डीएसओ ने कहा कि एस्ट्रोटर्फ बनने से क्षेत्र के खिलाड़ियों को बहुत लाभ मिलेगा। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं यहां पर कराई जा सकेंगी। परसराम ने कहा कि प्रदेश सरकार व खेल मंत्रालय खिलाड़ियों को हर संभव मद्द देने को तैयार है। खेल मंत्री संदीप सिंह के चलते प्रोजेक्ट को जल्द मंजूरी मिल गई।
एस्ट्रोटर्फ मैदान की खासियत:
एस्ट्रोटर्फ मैदान पूरी तरह समतल होता है। इसमें कृतिम खास उगाई जाती है, जो साधारण घास की अपेक्षा अधिक मजबूत होती है। खेल के दौरान यह उखड़ती नहीं है और एक बड़ी समस्या जैसे खेल के दौरान मैदान पर गड्ढे हो जाने की समस्या से छुटकारा मिल जाता है। इस मैदान पर दिन और रात दोनों टाइम मैच खेले जा सकते हैं। क्रिकेट मैदान की तरह इस मैदान पर फ्लड लाइट लगाई जाती हैं।