नाहड़ गांव के अर्द्धसैनिक बल के भूतपूर्व सैनिक अब पिछले दस साल का एरियर की मांग को लेकर मोर्चा खोलने की तैयारी में है। बृहस्पतिवार को यहां एक बैठक करने के बाद इसे लेकर केंद्रीय राज्य रक्षा मंत्री राव इंद्रजीत सिंह व प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को पत्र भेजा है। इसमें कहा है कि अगर उनका एरियर नहीं मिलता है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 सितंबर, 2013 को रेवाड़ी से अपनी रैली कर जहां से प्रचार शुरू किया था उसी जगह अर्द्धसैनिक बल के जवान अपनी रैली शुरू करेंगे।
बैठक की अध्यक्षता हेड कांस्टेबल वायरलैस ऑपरेटर वीरभान बड़गुर्जर ने की। उन्होंने कहा कि 15 दिसंबर को रेवाड़ी, 15 जनवरी को रोहतक में अनशन किया जाएगा। इसके बाद भी मांग नहीं मानी गई तो 15 फरवरी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन के लिए बैठ जाएंगे। उन्होंने कहा कि सैनिकों के लिए अहम मुद्दा 2006 से पहले रिटायर हुए पहले सैनिकों का है, जिनको 2006 से आजतक कुछ नहीं मिला। अपनी पहली वाली पेंशन से ही अपने बच्चो का लालन पालन कर रहे हैं। जबकि एक फौज के हवलदार को आज पेंशन के तौर पर 18 हजार रुपये मासिक मिल रहे हैं, वहीं आज अर्द्ध सैनिक बल के हवलदार को 8500 रुपये ही मिल रहे है।
सरकार सर्वोच्च न्यायालय के 7 मई, 2013, 2 सितंबर, 2013, 26 मार्च, 2015 और 13 अगस्त, 2015 के आदेशों का उल्लंघन कर रही है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का 26 मार्च, 2013 का आदेश था कि सभी केंद्रीय कर्मचारियों के पैसे जल्द से जल्द भुगतान किए जाएं। इसके बाद सरकार की तरफ से वकील एएसजी पिंकी आनंद ने कहा कि इस फैसले को लागू करने पर सरकार पर भारी आर्थिक दबाव आएगा। फैसले के अनुपालन के लिए कुछ समय दिया जाए। कोर्ट ने अनुरोध को स्वीकार करते हुए सरकार को 4 माह का समय दिया था, लेकिन चार माह की जगह आज आठ माह हो गए लेकिन अब सरकार की तरफ से 2006 से 2015 तक के समय का जो एरियर होता है वह भी नहीं दिया। इस मौके पर अर्द्ध सैनिक बल के पूर्व सैनिक व उनकी विरांगनाएं मौजूद थी।