रेवाड़ी। अब स्कूल शिक्षा विभाग भी वित्तीय लेन-देन में स्पष्टता लाने के लिए स्पर्श एप का उपयोग शुरू होगा। सबसे पहले जिले के 11 पीएमश्री स्कूलों में यह व्यवस्था लागू की जाएगी। समग्र शिक्षा अभियान के तहत संबंधित अकाउंट कर्मियों को स्पर्श एप के संचालन के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण में कर्मचारियों को लॉगिन प्रक्रिया, डेटा एंट्री, बिल और भुगतान दर्ज करने के तरीके और रिपोर्ट तैयार करने जैसे सभी चरणों की जानकारी विस्तार से समझाई जाएगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे कार्य प्रणाली में तकनीकी त्रुटियों की संभावना कम होगी।
विभाग की इस पहल के तहत सबसे पहले पीएमश्री राजकीय स्कूलों को मिलने वाले फंड, ग्रांट और अन्य मदों से जुड़े भुगतानों को पूरी तरह ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा।
एप के माध्यम से स्कूलों के खर्च, भुगतान और ग्रांट की स्थिति रियल टाइम में उपलब्ध होगी जिससे विभागीय कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी। स्पर्श एप लागू होने के बाद किसी भी योजना के वित्तीय लेन-देन की स्थिति एक क्लिक में देखी जा सकेगी।
इससे अनियमितताओं पर भी लगाम लगेगी और स्कूलों को मिलने वाले फंड के उपयोग की निगरानी अधिक मजबूत होगी। जल्द ही जिले सहित पूरे प्रदेश के अकाउंट कर्मियों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण देकर इसे लागू कर दिया जाएगा।
समग्र शिक्षा अभियान को मिलेगी नई गति
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्पर्श एप के माध्यम से विभागीय फंड के सही उपयोग, सतत निगरानी और पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। यह कदम मुख्यमंत्री के ई-गवर्नेंस और डिजिटल हरियाणा अभियान को भी मजबूत आधार देगा।
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केंद्र और प्रदेश सरकार दोनों का बजट होता है शामिल
गौरतलब है कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत अधिकांश विकास कार्यों में केंद्र और प्रदेश सरकार दोनों का बजट शामिल होता है। अक्सर ऐसा देखा गया है कि केंद्र सरकार का बजट समय पर खर्च हो जाता है जबकि प्रदेश सरकार का हिस्सा विलंब से पहुंचने के कारण कई परियोजनाएं अधूरी रह जाती हैं। ऐसे में स्पर्श एप एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसकी मदद से केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर जारी फंड की रियल टाइम ट्रैकिंग संभव होगी। इससे न केवल सभी योजनाओं की प्रगति पर बेहतर नजर रखी जा सकेगी बल्कि विकास कार्यों की गति भी बढ़ेगी और वित्तीय पारदर्शिता को नई दिशा मिलेगी।
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वर्जन :
स्पर्श एप का उद्देश्य विभागीय कार्यों को पूरी तरह डिजिटल बनाना है। इससे स्कूलों के खातों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। प्रत्येक खर्च का डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा जिससे किसी भी स्तर पर जांच और निगरानी आसान होगी।
-दुष्यंत सिंह, प्राचार्य, पीएमश्री वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बिठवाना।