जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बाहर बच्चों सहित आमरण अनशन पर बैठने के साथ ही पीएम तक पत्र भेजकर पेंशन और एसीपी का समाधान कराने की गुहार लगा चुके सेवानिवृत्त मुख्य शिक्षक रतनलाल गुप्ता ने अब सरकार से इच्छा मृत्यु का हक मांगा है। गुप्ता तहसील कार्यालय में शुरू हुई सीएम विंडो पर अपनी शिकायत दर्ज कराते हुए यह मांग रखी है। शिक्षक ने सहकारिता राज्यमंत्री को भी पत्र सौंपा है और एक प्रति शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा को भी भेजी है।शिकायत में सेवानिवृत्त शिक्षक ने बताया कि वह 28 फरवरी 2014 को सेवानिवृत्त हो गया था। एसीपी के साथ ही उसकी सर्विस बुक एक अक्तूबर 2012 में विभाग के पास गई थी, लेकिन आज तक न तो एसीपी का समाधान हुआ और न ही पेंशन मिल पाई है।
20 अक्तूबर को दिया था धरना
गुप्ता ने बताया कि आठ माह तक शिक्षा विभाग कार्यालय के चक्कर लगाने के बाद जब कोई हल नहीं निकल पाया तो वे अपने बच्चों सहित 20 अक्तूबर को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बाहर आमरण अनशन पर बैठ गया। उस समय अगले ही दिन उपायुक्त के आदेश पर तहसीलदार विजय सिंह ने जूूस पिलाकर यह कहकर अनशन तुड़वा दिया था कि, उनकी पेंशन, ग्रेच्यूटी के 30 लाख रुपये एक माह के अंदर मिल जाएगी।
उसके साथ भेजी अन्य की एसीपी आई
शिकायत में पूर्व मुख्य अध्यापक ने बताया कि उसके बाद भेजी गई सभी एसीपी वापस आ गई, लेकिन उसकी आज तक नहीं आई। न्याय के लिए उसने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से भी सिर्फ तारीख ही मिली। सीएम विंडो के जरिए दी शिकायत में उसने बताया कि सरकार पेंशन का हक नहीं दिला सकती है तो नववर्ष पर कम से कम इच्छा मृत्यु का अधिकार तो दे ही सकती है।