निर्भया के साथ गैंगरेप और यातना देने वाले तथाकथित नाबालिग अपराधी को मात्र तीन वर्ष की सजा के बाद रिहा किये जाने को लेकर चल रहे मामले में रेवाड़ी में भी कई संगठनों ने रोष जताया।
रविवार को वेद प्रचार मंडल, सोसायटी ऑफ सोशल पर्सन्ज, मिशन ऑफ एजुकेशन, पवित्रता प्रतिष्ठान के अध्यक्षों और अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने लघु सचिवालय के सामने धरना देकर अपराधी को रिहा न किए जाने की मांग उठाई। धरने की अध्यक्षता शिक्षाविद प्रो. अनिरूद्ध यादव ने की। करीब दो घंटा धरना देने के बाद प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति के नाम उपायुक्त के प्रतिनिधि रेवाड़ी के तहसीलदार नोरंग लाल को ज्ञापन सौंपा।
वेद प्रचार मंडल रेवाड़ी के प्रवक्ता अनिल आर्य पाल्हावास ने कहा कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मांग की गई है कि राष्ट्र प्रमुख होने के नाते वे ऐसी भूमिका निभाए जिससे संसद और न्यायपालिका दोनों मिलकर देश में एक बेटियों की सुरक्षा व सम्मान का सशक्त रक्षक कानून बनाए।
आज के लचर कानून को पैसे, सत्ता और बाहुबल के प्रभाव से कैसे भी तोड़ा मरोड़ा जा सकता। विशेष तौर पर इस दुर्दांत अपराधी को जिस की भयंकर यंत्रणा के कारण निर्भया की दर्दनाक मौत हुई, उसे समाज में खुला घूमने के लिये नहीं रिहा किया जाए क्योंकि इससे समाज में एक गलत संदेश जाएगा, अपराधियों की हौसला अफजाई होगी।
भारतीय कानून की जो सुधारवादी मंशा है, उसके अनुसार भी जेलर की रिपोर्ट के मुताबिक इस दरिंदे के व्यवहार और मानसिकता में कोई सकारात्मक परिवर्तन नहीं दिखाई देने के कारण उसे रिहा करना खतरे से खाली नहीं। पता नहीं कितनी ही और घिनौनी वारदातों को यह अंजाम दे डाले।
इसके अलावा ज्ञापन में जघन्य बालिगान अपराध करने वालों की अल्पव्यस्कता की आयु 18 से कम करके 16 की नहीं करने पर संसद की निंदा की गई है तथा दोषी के नाबालिग होने के नाम पर निर्भया के साथ अदालती अन्याय हुआ बताया। ठोस कानून बनवाने के लिये राष्ट्रपति से अपना प्रभाव इस्तेमाल करने का पुरजोर आग्रह किया है। इस दौरान कृष्ण महाशय पीथनवास, कमल सिंह आर्य रेवाड़ी, एडवोकेट कैलाश चंद, पवन कुमार, सतबीर सिंह ढिल्लो बनीपुर आदि उपस्थित रहे।