रेवाड़ी। शहर में सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर रोक लगाने के लिए बनाए गए कानूनों के बावजूद जिला प्रशासन सवालों के घेरे में है। कागजों में सख्त नियम और जिम्मेदारी तय होने के बावजूद जमीन पर कार्रवाई बेहद सीमित नजर आती है।
स्थिति यह है कि धूम्रपान रोकने के लिए जिम्मेदार 13 विभागों में से ज्यादातर विभाग इस दिशा में सक्रिय नहीं दिखाई देते जबकि पुलिस विभाग ही इस जिम्मेदारी को निभाता हुआ नजर आ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े भी इस स्थिति को उजागर करते हैं।
विभाग की ओर से नागरिक अस्पताल परिसर में पिछले पांच साल के दौरान धूम्रपान करने वाले 1545 लोगों के चालान किए गए हैं। इन चालानों के माध्यम से कुल 73 हजार 715 रुपये का जुर्माना वसूला गया है। अस्पताल परिसर में रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही के बीच यह संख्या काफी कम मानी जा रही है।
दरअसल, सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान रोकने के लिए कोटपा एक्ट 2003 लागू किया गया है। इस कानून के तहत अस्पताल, सरकारी कार्यालय, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, बाजार और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पूरी तरह प्रतिबंधित है।
शहर में कई स्थानों पर लोग खुलेआम सिगरेट पीते दिखाई देते हैं। प्रशासन की ओर से समय-समय पर अभियान चलाने के दावे जरूर किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में कार्रवाई बेहद सीमित रह जाती है।
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धूम्रपान को रोकने के लिए 13 विभागों की जिम्मेदारी
नियमों के अनुसार धूम्रपान रोकने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य, पुलिस, शिक्षा, नगर परिषद, परिवहन सहित कुल 13 विभागों को दी गई है। इन विभागों को अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी रखते हुए नियमों का पालन सुनिश्चित करना होता है। इसके बावजूद अधिकतर विभाग इस जिम्मेदारी को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। शहर के कई सार्वजनिक स्थानों पर लोग खुलेआम धूम्रपान करते देखे जा सकते हैं। बस स्टैंड, बाजार, सरकारी दफ्तरों के बाहर और अस्पताल परिसर के आसपास अक्सर लोग सिगरेट पीते नजर आते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर सभी विभाग सक्रिय होते तो शायद स्थिति कुछ अलग होती।
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वर्जन:
सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पूरी तरह प्रतिबंधित है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कोटपा एक्ट के तहत कार्रवाई की जाती है और आगे भी अभियान जारी रहेगा। वहीं विभागों को समय-समय पर कार्रवाई के लिए लिखा जाता है लेकिन उनकी तरफ से कोई भी रिपोर्ट नहीं आती है।
-डॉ. मीत, नोडल अधिकारी, कोटपा