रेवाड़ी। पटाखों के इस्तेमाल से वायु प्रदूषण होता है। वहीं पटाखों के धुएं से सेहत पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है।
फिजिशियन डॉ. मनीष ने बताया कि पटाखों का सबसे ज्यादा असर अस्थमा के मरीजों पर होता है। अस्थमा एक क्रॉनिक डिजीज है, जिसमें सांस लेने में परेशानी होती है। यह किसी भी उम्र के लोगों को हाे सकता है। हालांकि बुजुर्गों में इसका खतरा अधिक होता है। अस्थमा के मरीजों के लिए वायु प्रदूषण बहुत खतरनाक है। इसलिए उन्हें पटाखों और धुएं से बचना जरूरी है।
छोटे बच्चों का शरीर विकसित स्टेज में होता है। इसलिए पटाखों के धुएं और उससे पैदा होने वाले प्रदूषण का शरीर पर वयस्कों से ज्यादा बुरा असर पड़ता है। उनके फेफड़े, ब्रेन और बॉडी की सेल्स अभी बन रही होती हैं। अगर इस स्टेज पर प्रदूषित हवा, केमिकल्स और धुएं से बच्चे का ज्यादा एक्सपोजर हो तो इससे उनका विकास भी प्रभावित हो सकता है। कई बार यह गंभीर बीमारियों या डेवलपमेंट डिफेक्ट का कारण भी बन सकता है। इसलिए छोटे बच्चों और शिशुओं को पटाखों से विशेष तौर पर दूर रखने की जरूरत होती है।