रेवाड़ी। शहर के नागरिक अस्पताल में दवाइयों का टोटा बना हुआ है। तीन महीने से एक रुपये कीमत वाली गोली तक का स्टॉक नहीं है। हालात यह है कि बार-बार रिमाइंडर भेजे जाने के बाद भी वेयर हाउस से अस्पताल में दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक नहीं भेजा जा रहा है। उधर, सिविल सर्जन का दावा है कि अस्पताल में दवाइयों की कमी नहीं है। यहां कमी पूरी करने के लिए वेयर हाउस से दवाइयां लगाता आ रही हैं। वहीं जो दवाई नहीं हैं, उसके लिए सरकार बजट दे रही है। मरीजों को दवाई उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है।
रेवाड़ी के नागरिक अस्पताल में हर दिन करीब 1600 ओपीडी होती है। पहले अस्पताल में डॉक्टरों की काफी कमी थी, लेकिन पिछले दिनों नए डॉक्टरों की भर्ती के बाद रेवाड़ी को भी 15 से ज्यादा नए चिकित्सक मिले। चिकित्सक की कमी तो कुछ हद तक पूरी हो गई, लेकिन दवाइयां का टोटा आज भी बरकरार है। हालात यह है कि मरीजों को बाहर से महंगे दामों वाली दवाईयां खरीदनी पड़ रही है।
7 हजार प्रति दिन की डिमांड, स्टॉक में एक गोली तक नहीं
बारिश के मौसम के बाद तेजी से वायरल बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या में दो गुना से भी ज्यादा इजाफा हुआ है। वायरल बुखार में हर दिन 7 हजार पैरासिटामॉल (पीसीएम) और 10 हजार स्ट्राजिन की गोलियां की आवश्यकता है, लेकिन स्टॉक की बात करें तो नागरिक अस्पताल के फार्मा विभाग में फिलहाल इन दोनों ही दवाइयों की गोली तक उपलब्ध नहीं है। चिकित्सक सबसे ज्यादा इन्हीं दोनों दवाइयों को लिखते है, लेकिन मरीज अस्पताल में दवाई उपलब्ध नहीं होने की वजह से बाहर खुले मेडिकल स्टोर पर खरीदने को मजबूर है।
- डिक्लोफेनाक भी उपलब्ध नहीं
बीमारी के इस सीजन में सबसे ज्यादा यूज होने वाली डिक्लोफेनाक की गोली भी रेवाड़ी के सबसे बड़ी सरकारी अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। ये गोली बुखार, मांसपेशियों व सिर दर्द, मुंह के घाव, आंखों में दर्द आदि में उपयोग होती है। इसके अलावा गैस, एसिडिटी में दी जानी वाली रूटीन बीमारी की गोलियां तक स्टॉक में नहीं होने से मरीजों को बीमारी के साथ-साथ सिस्टम से दो-चार होना पड़ रहा है।
मरीज और तीमारदार बोले-समस्या पर नहीं दिया जा रहा ध्यान
अपनी पोती को दिखाने आई थी, तब चिकित्सक ने दवाई लिखी। अस्पताल से एक भी दवाई नहीं मिली। पेन किलर भी नहीं मिल पा रही है। समस्या पर कोई ध्यान नहीं देने वाला है। अस्पताल का हाल बदहाल हो चुका है।
- सुमन देवी, मोहदीनपुर।
बुखार से पीड़ित हूं। चिकित्सक की ओर से कुल सात दवाइयां लिखीं गई, जिसमें से केवल एक ही दवाई मिल पाई है। अब बाकी दवाइयां बाहर से ही लेनी पड़ेगी। अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे मरीज परेशान हो रहे हैं।
- संजय कुमार, विजय नगर रेेवाड़ी।
आंख दिखाने के लिए आई थी। डॉक्टर ने तीन दवाइयां लिखीं थीं, जिनमें केवल एक ही दवाई मिल पाई है, बाकी दवाई बाहर बाहर से लेने को कहा गया। अस्पताल का हाल बदहाल हो चुका है। यहां मरीजाें और तीमारदारों की सुनने वाला कोई नहीं है।
-सुमित्रा देवी, शहर निवासी।
दांत में दर्द हो रहा है। डॉक्टर को दिखाने के लिए आई थी। दो दवाई लिखी थी, लेकिन एक भी दवाई नहीं मिली। सारी दवाई बाहर मेडिकल से लेने को कहा गया। इससे आर्थिक नुकसान हो रहा है।
- सविता देवी, शहर निवासी।
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- वर्जन:
जो दवाइयां वेयर हाउस से नागरिक अस्पताल में आ रही हैं, वे मरीजों को दी जा रही हैं। इसके अलावा जो दवाइयां नहीं हैं, उनको खरीदने के लिए विभाग बजट उपलब्ध करा रहा है। जिले की सीएचसी व पीएचसी में हमारे पास हर प्रकार की दवाई हैं और न ही किसी प्रकार के बजट की कमी है।
- डॉ सुदर्शन पंवार, सीएमओ, रेवाड़ी।
दवाइयां वेयर हाउस से कम आ रही हैं। सीएमओ कार्यालय में बजट आ गया है। जल्द ही दवाइयां खरीद ली जाएंगी।
- डॉ जयभगवान, पीएमओ, सामान्य अस्पताल, रेवाड़ी।