संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूकता अभियान चलाए जाने के बाद भी जिले के लिंगानुपात अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। जिले के 16 गांव रेड जोन में हैं जहां एक हजार लड़कों पर लड़कियां की संख्या 800 से कम है।
स्वास्थ्य विभाग ने कम लिंगानुपात वाले गांवों में सुधार के लिए प्रत्येक गर्भवती महिला की आरसीएचआईडी बनवाने का निर्णय लिया है। सभी की एएनसी पंजीकृत की जाएगी।
पंजीकरण के बगैर कोई भी गर्भवती अल्ट्रासाउंड नहीं करा सकेगी और न डिलीवरी हो सकेगी। पिछले दिनों सोनीपत स्वास्थ्य विभाग की टीम ने धारूहेड़ा में रेवाड़ी टीम के सहयोग से छापा डालकर अवैध गर्भपात करने का भंडाफोड़ किया था।
जनवरी में प्रति एक हजार लड़कों के मुकाबले में 815 लड़कियों ने जन्म लिया। रेवाड़ी राज्य में सबसे कम लिंगानुपात वाले जिलों में दूसरे नंबर पर है। लिंगानुपात में गिरावट चिंता बढ़ाने वाली बात है। वर्ष 2024 में औसत लिंगानुपात 873 रहा, जो बीते 8 वर्षों में सबसे खराब स्तर पर था।
वर्ष 2023 में 1 हजार लड़कों के मुकाबले 915 लड़कियां जन्मी थीं। जिले का लिंगानुपात 5 वर्षों के दौरान 900 के पार रहा है। वर्ष 2018 से 2021 तक लगातार तथा 2023 में लिंगानुपात में सुखद परिणाम रहे हैं। यानी इन सालों में अपेक्षाकृत सुधार हुआ आ है।
हालांकि बाकी वर्षों में जिले को शर्मिंदगी ही झेलनी पड़ी है। 2018 से पहले तो प्रदेश के साथ ही जिले की भी स्थिति खराब थी। इसमें धीरे-धीरे सुधार आया है।