रेवाड़ी। जिले में डेंगू संक्रमण के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। पिछले सात दिनों के दौरान डेंगू के 50 मरीज बढ़े हैं। इस दौरान एक मलेरिया का भी मरीज मिला है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार शुक्रवार को डेंगू के सात मरीज मिले। इसे साथ ही जिले में डेंगू संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 256 पहुंच गई। इनमें से 149 मरीज निजी अस्पतालों में तो 107 सरकारी अस्पताल में मिले। विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में वर्तमान में कुल डेंगू के 21 मरीज भर्ती हैं। शुक्रवार को मिले सात मरीजों में तीन मरीज नागरिक अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं तीन मरीजों को स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम लोगों के घरों में पहुंचकर मच्छरों के लार्वा की जांच कर रही है। अभी तक कुल 3028 लोगों के रक्त सैंपल लिए गए हैं। वहीं मच्छरों का लार्वा पाए जाने पर 4380 लोगों को चेतावनी नोटिस दिए जा चुके हैं।
डेंगू के बढ़ रहे मामलों के चलते विभिन्न अस्पतालों में भर्ती मरीजों में प्लेटलेट्स की मांग बढ़ी है। नागरिक अस्पताल के ब्लड बैंक से जून से अब तक कुल 67 यूनिट प्लेटलेट्स डेंगू संक्रमित मरीजों को चढ़ाए जा चुके हैं। इसमें जून में जहां सिर्फ एक यूनिट रक्त दिया गया था, वहीं जुलाई में 12, अगस्त में 37 यूनिट प्लेटलेट्स के लिए दिया गया। सितंबर में अभी तक 11 यूनिट रक्त विभिन्न मरीजों को चढ़ाया गया है। ब्लड बैंक प्रभारी डाॅ. नीतू सिंह का कहना है कि पिछले दो तीन दिनों से प्लेटलेट्स को लेकर मरीज कम आ रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि प्लेटलेट्स कम होने को लेकर मरीजों को ज्यादा परेशान नहीं होना चाहिए। चिकित्सकों द्वारा दी गई दवा, तरल पदार्थों का सेवन करते रहने से सुधार हो जाता है। सरकारी स्वास्थ्य विशेषज्ञ 20 हजार से नीचे प्लेटलेट्स आने पर मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की सलाह देते हैं। कई बार मरीज की स्थिति को देखते हुए 30 से 40 हजार प्लेटलेट्स वालों को भी चढ़ाया जा सकता है।
वर्जन:
सरकारी अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों को प्लेटलेट्स निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। ब्लड बैंक में अभी रक्त की कमी नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर फोन करके रक्तदाता को बुलाया जाता है। प्लेटलेट्स निकालकर ज्यादा दिन तक सुरक्षित रखना संभव नहीं है। इसलिए मरीज की डिमांड के अनुसार ही उपलब्ध कराया जाता है। निजी अस्पतालों में 11 हजार रुपये से अधिक प्लेटलेट्स नहीं लिया जा सकता। इस बारे में सिविल सर्जन के माध्यम से सभी अस्पताल और ब्लड बैंक संचालकों को दिशा निर्देश दिए गए हैं।
-डाॅ. नीतू सिंह, प्रभारी ब्लड बैंक, नागरिक अस्पताल रेवाड़ी।