रेवाड़ी। हरियाणा सरकार ने नए साल में अस्थायी मान्यता प्राप्त स्कूलों को एक बार फिर से झटका दिया है। दरअसल, प्रदेश सरकार हर साल बांड राशि भरने के इन स्कूलों को एक्सटेंशन देती है। नया साल शुरू होते ही स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने एक पत्र जारी करके इस दिशा में सख्त कदम उठाने के लिए कहा है। साथ ही जिला शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से इस संबंध में रिपोर्ट मंगवाएंगे। सरकार की ओर से जारी पत्र के अनुसार नए शिक्षा सत्र में कक्षाओं को सुचारु रूप से चलाने के लिए स्कूल संचालकों को बांड राशि 31 मार्च से पहले जमा करवानी होगी। स्कूल के संचालन को लेकर इमारत के संबंध में पहले से जारी किए गए निर्देशों को लागू करते हुए प्रमाण पत्र विभाग को देना होगा।
बच्चे रहते हैं तनाव में
जिले में करीब 49 अस्थायी मान्यता प्राप्त स्कूल चल रहे हैं। इनमें बच्चे तो हजारों की संख्या में पढ़ते हैं, लेकिन उनकी स्थायी मान्यता को लेकर हर साल विवाद होता है। हालांकि, यह संख्या पिछले वर्ष की है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब कई स्कूलों ने मान्यता ले ली है, संख्या कम भी हो सकती है। बचे इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के पास अन्य स्कूलों का विकल्प न होने के कारण वह अपनी परीक्षाओं को लेकर तनाव में रहते हैं। फरवरी में दसवीं तथा 12वीं कक्षा की वार्षिक परीक्षाएं शुरू होने जा रही हैं, लेकिन अभी तक निजी अस्थायी मान्यता प्राप्त स्कूलों के बच्चों के बोर्ड परीक्षा फार्म भी जमा नहीं हो पाए हैं। दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की चेक लिस्ट भी जारी हो चुकी है।
बांड राशि नहीं भरी तो होगी कार्रवाई
सरकार ने अपने पत्र में साफ कर दिया है कि अगर निजी स्कूल संचालकों ने स्थायी मान्यता के लिए बांड की राशि नहीं भरी तो बच्चों के भविष्य को लेकर स्कूल संचालक ही जिम्मेदार होंगे। सरकार की तरफ से यह पत्र जारी किए जाने के बाद वीरवार को निदेशालय ने आगे प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से इस संबंध में मौजूदा स्टेटस रिपोर्ट तलब कर ली है। इसके बाद अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को लेकर सरकार आगे की कार्रवाई करेगी।
शिक्षा निदेशालय की तरफ से पहले भी इस तरह के आदेश आए थे। उस दौरान रिपोर्ट दी गई थी। इस बार निर्देश मिलते ही आगे की प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी। -वीरेंद्र, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।