रेवाड़ी। भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी शनिवार को सूर्योदय से रात्रि में अष्टमी तिथि प्राप्त होने से जन्माष्टमी व्रत सभी जनों द्वारा व गोकुलाष्टमी (नंदनोत्सव) मनाया जाएगा। इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी में सर्वार्थ सिद्धि और अमृतसिद्धि तथा बुधादित्य योग आदि बन रहे हैं।
शहर के धारूहेड़ा चुंगी स्थित ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री के अनुसार भागवत पुराण के दशम स्कंध के अनुसार कंस के कारागार में माता देवकी के गर्भ से कृष्ण के प्राकट्य से ठीक पहले सुहावना समय आया। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्णपक्ष, अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, वृष राशि गत, मध्यरात्रि को हुआ था।
ज्योतिषाचार्य शास्त्री के अनुसार (विष्णु धर्मोत्तर) पुराण के अनुसार अर्धरात्रि में रोहिणी नक्षत्र प्राप्त होने पर सदा कृष्णाष्टमी होती है।
इसमें भगवान कृष्ण की अर्चना तीन जन्मों के पापों को नष्ट कर देती है। मध्य रात्रि में अष्टमी तिथि के रोहिणी नक्षत्र से युक्त होने पर बालरूपी चतुर्भुज भगवान कृष्ण उत्पन्न हुए थे। भाद्रपद कृष्ण पक्ष में जब रोहिणी नक्षत्र से युक्त अष्टमी तिथि अर्धरात्रि में दृश्य होती है तो जन्माष्टमी का मुख्यकाल होता है। कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण है श्रीकृष्ण का व्रत करने से समस्त दुखों से छुटकारा मिलता है।
ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री