- सर्दी, खांसी, जुकाम के मरीजों के लिए जा रहे नमूने
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिले में एचएमपी वायरस के अलर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग ने स्क्रीनिंग पर काफी जोर दिया है। रोजाना करीब 300 सर्दी, खांसी, जुकाम के मरीजों की स्क्रीनिंग की जा रही है। राहत की बात यह है कि जिले में अब तक ऐसा कोई भी मरीज सामने नहीं आया है।
वर्तमान में एचएमपीवी के लिए कोई खास एंटी वायरल दवा या टीका उपलब्ध नहीं है। हल्के मामलों में आराम करने और शरीर को हाइड्रेट रखने से राहत मिल जाती है। बुखार और नाक बंद को नियंत्रित करने के लिए सामान्य दवाएं पर्याप्त हैं। गंभीर मामलों में विशेष रूप से निमोनिया या ब्रॉकियोलाइटिस से पीड़ित रोगियों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता हो सकती है। वहीं, एचएमपीवी के हल्के मामले आमतौर पर कुछ दिनों से लेकर एक सप्ताह तक चलते हैं। गंभीर मामलों में, बेहतर महसूस करने में अधिक समय लग सकता है।
इस बीमारी को पहली बार 2001 में खोजा गया
इस बीमारी को पहली बार 2001 में खोजा गया था। इसके मामले ज्यादातार ठंड के मौसम में देखे जाते हैं। पैरामाइक्सोविस्डेि और रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस (आरएसवी) से संबंधित यह वायरल रोगजनक सभी आयु वर्ग के लोगों में सांस संबंधी बीमारियों का कारण बनता है। एचएमपीवी खांसने या छींकने से निकलने वाली रेस्पिरेटरी ड्रापलेट्स के साथ-साथ दूषित सतहों को छूने या संक्रमित व्यक्तियों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। यह वायरस सांस लेने में हल्की असुविधा से लेकर गंभीर बीमारियों का कारण खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में बनता है।
वर्जन:
एचएमपी वायरस को लेकर स्क्रीनिंग पर जोर दिया गया है। रोजाना करीब 300 सर्दी, खांसी, जुकाम के मरीजों की स्क्रीनिंग की जा रही है। जिले में अब तक ऐसा कोई भी मरीज सामने नहीं आया है।
-डॉ. दीपक वर्मा, डिप्टी सिविल सर्जन, नागरिक अस्पताल