संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। दो कंपनियों पर खराब डीजल आपूर्ति करने का आरोप लगाने के मामले में जब आर्थिक अपराध शाखा ने जांच की तो रोडवेज के जीएम खुद अनियमितताओं में फंस गए। पुलिस ने जीएम की ओर से खराब डीजल मामले में दर्ज कराई गई एफआईआर को रद्द कर दिया।
रेवाड़ी रोडवेज डिपो की ओर से मार्च में दो तेल कंपनियों फ्यूल विंग और श्री तीर्थ स्वामी पर खराब डीजल आपूर्ति करने के आरोप लगाए थे। रोडवेज के महाप्रबंधक देवदत ने पुलिस को दी शिकायत में कहा था कि 12 फरवरी से डीजल की आपूर्ति लगातार चली आ रही थी। जब बसों को मार्ग पर भेजा गया तो बीएस-6 बसों से धुआं आने और रास्ते में ही ब्रेकअप की समस्याएं पैदा होने लगी। जब बसों को संबंधित एजेंसी में दिखाया गया तो बताया गया कि बसें सही हैं। उसमें डाले गए डीजल में कमी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही शिकायत दी गई थी।
पुलिस इस मामले की जांच पूरी कर चुकी है। पुलिस ने जांच के बाद मामले में रोडवेज जीएम की तरफ से दोनों कंपनियों पर दर्ज कराई गई एफआईआर को रद्द कर दिया है। पुलिस जांच में कई अहम खुलासे भी हुए हैं। आर्थिक अपराध शाखा के निरीक्षक मनोज कुमार ने जांच की थी।इसमें सामने आया है कि रोडवेज जीएम की तरफ से तेल जांच कराने को लेकर नियमों का पालन नहीं किया गया है। कई अनियमितताएं बरती गईं हैं। इसमें आईओसीएल की कार्यशैली पर भी सवाल उठे हैं।
रेवाड़ी फ्यूल विंग्स की ओर से एसपी को शिकायत दी गई थी कि रोडवेज महाप्रबंधक देवदत्त ने 1.5 करोड़ में से 1.2 करोड़ का भुगतान किया लेकिन भुगतान के दिन ही उन्होंने हाई-स्पीड डीजल की खराब गुणवत्ता के संबंध में एक झूठी शिकायत दर्ज कराई। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि रोडवेज के जीएम ने नमूनों में हेरफेर किया था। उन्होंने बिना उचित सील के एक महीने पुराने नमूने जमा किए जोकि जांच में फर्जी साबित हुए। जांच के बाद पुलिस ने फ्यूल विंग्स के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया और सभी आरोप रोडवेज के जीएम और उस आईओसीएल अधिकारी के खिलाफ साबित हुए, जिन्हें जीएम रेवाड़ी द्वारा टेंडर सौंपा गया था।
दोनों कंपनियों के 42 लाख फंसे
फ्यूल विंग्स के मैनेजर साहिल यादव ने बताया कि हमारी 32 लाख की पेमेंट अभी तक रोकी गई है, जिससे संचालन पर गंभीर वित्तीय दबाव पड़ रहा है। लगातार फॉलो-अप के बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा अब तक कोई स्पष्ट समाधान नहीं किया गया है। दोनों कंपनियों को मिलाकर कुल 42 लाख रुपये रोडवेज की तरफ से नहीं दिए गए हैं। रोडवेज का कहना है कि हमने 22 लाख रुपये दे दिए हैं।
बीएस 6 बसों के चालकों को नहीं दिया गया था प्रशिक्षण
फरवरी और मार्च में बीएस-6 की बसों में लगातार गड़बड़ी सामने आ रही थी, जिसके बाद खराब डीजल आपूर्ति करने के आरोप दोनों कंपनियों पर लगाए गए थे। इस पर जीएम की तरफ से कहा गया था कि डीजल की जांच करवाई जाएगी। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि बीएस-6 बसों को चलाने को लेकर चालकों को कोई विशेष ट्रेनिंग भी नहीं दी गई है जबकि ट्रेनिंग देने का प्रावधान था। रोडवेज बसों में कमी किस वजह से आ रही थी, अभी भी यह सवाल बरकरार है।