रेवाड़ी। जिले में पशुओं में लंपी का संक्रमण बढ़ रहा है। अब तक 247 गोवंश संक्रमित हुए हैं जबकि 36 के नमूनों की जांच आनी बाकी है। पशु पालन विभाग ने संक्रमित पशुओं की निगरानी शुरू कर दी है। जो पशु लंपी से पीड़ित पाए जा रहे हैं उनका टीकाकरण किया जा रहा है।
राजस्थान से जिले में आने वाले पशुओं के झुंड में कुछ लंपी से संक्रमित होते हैं जिनके माध्यम से यह बीमारी जिले के पशुओं में फैल रही है। राजस्थान के चरवाहे बड़ी संख्या में पशुओं को लेकर जिले में आते हैं।
लंपी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए पशुपालन विभाग ने पशुपालकों के लिए एडवाइजरी जारी कर बचाव के तरीके बताए गए हैं। साथ ही जिलेभर में विशेषकर राजस्थान से आने वाले पशुओं के झुंडों में संक्रमित गोवंश का टीकाकरण भी किया जा रहा है।
संक्रमण के कारण पशुओं की दूध देने की क्षमता कम हो जाती है। गंभीर स्थिति में पशु की जान जाने का खतरा बना रहता है। हालांकि विभाग के पास एलएसडी (लंपी स्किन डिजीज) से किसी भी पशु की मौत का आंकड़ा नहीं है।
राजस्थान की सीमा से सटे गांवों के साथ ही मुख्य सड़कों के किनारे स्थित गांवों में संक्रमण का खतरा अधिक है। हालांकि विभाग के संबंधित क्षेत्र में पशु चिकित्सालयों एवं औषधालयों की टीमें लगातार निगरानी रख रही हैं। जिले की गोशालाओं में भी टीमें टीकाकरण अभियान चला रही हैं।
पांच साल बाद फिर बढ़ा खतरा
वर्ष 2021-22 में लंपी संक्रमण के मामले सामने आने के बाद पशुओं के टीकाकरण पर जोर दिया गया था। इसके बाद बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण और निगरानी को लेकर पशुपालन विभाग की ओर से गंभीरता नहीं दिखाई गई। अब करीब पांच साल बाद एक बार फिर संक्रमण के मामले बढ़ने से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। जिले में अभी भी राजस्थान की ओर से आने वाले 50 से अधिक गोवंशों के झुंड अलग-अलग क्षेत्रों में घूम रहे हैं। इन झुंडों में से लंपी या अन्य बीमारियों से ग्रस्त गायों को झुंड से अलग छोड़ दिया जाता है। हालांकि विभाग का दावा है कि इन झुंडों के साथ-साथ बेसहारा गोवंश के कारण लगातार संक्रमण बढ़ रहा है।
ये हैं लंपी के लक्षण, ऐसे करें बचाव
पशु चिकित्सकों के अनुसार पशुओं में तेज बुखार, त्वचा पर गांठें, आंख और नाक से स्राव, भूख कम लगना और दूध उत्पादन में कमी लंपी के प्रमुख लक्षण हैं। संक्रमण मुख्य रूप से मच्छर, मक्खी जैसे खून चूसने वाले कीटों के माध्यम से फैलता है। पशुशाला की नियमित सफाई, कीट नियंत्रण और साफ पानी की व्यवस्था जरूरी है। लक्षण दिखाई देने पर संक्रमित पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखना चाहिए। पशुपालकों को स्वयं दवा देने के बजाय तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। यह बीमारी मनुष्यों में नहीं फैलती, इसलिए घबराने के बजाय सावधानी और समय पर उपचार पर ध्यान देना जरूरी है।
वर्जन:
जिले में 60 हजार गोवंश हैं। 55 हजार पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है। 48 हजार पशुओं का टीकाकरण किया गया है। जिले में 247 गोवंश लंपी से संक्रमित पाए गए हैं। उपचार के बाद 150 पशुओं में काफी सुधार है। एक सप्ताह में 36 नमूने भेजे गए हैं जिनकी रिपोर्ट आनी शेष है। जिले में सात सितंबर तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। बाहर से आने वाले पशुओं की निगरानी की जा रही है। संक्रमित पशुओं का टीकाकरण किया जा रहा है।-डॉ. विनोद कुमार यादव, उप निदेशक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, रेवाड़ी।
शहर की सड़कों पर घूम रहे लंपी के संभावित संक्रमित पशु। संवाद