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स्कूल अपग्रेड: आंखों में आंसू, मुंह से निकला थैंक्यू अमर उजाला

Fri, 02 Jun 2017 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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13 दिन के लंबे संघर्ष के बाद आखिर हमारी बेटियां जीत ही गईं।
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कड़ी धूप और धूल भरी आंधी के बाद बारिश भी राजगढ़ की बेटियों की परीक्षा ले रहा था। बेटियां तो शिक्षित होने के लिए हक की मांग कर रहीं थी लेकिन सरकार के साथ मौसम भी उनके धैर्य की परीक्षा ले रहा था।
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बेटियों ने धैर्य के साथ सबका मुकाबला किया। गर्मी में तबीयत खराब होने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। 13 दिन लगातार धूप में तपकर की तपस्या का फल वीरवार शाम को मिल गया। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी राज्यमंत्री डॉ. बनवारीलाल ने जूस पिलाकर छात्राओं का धरना समाप्त कराया तो उनकी आंखों में विजय और सफलता के आंसू बरबस ही निकल आए।
13 दिन लगातार खबर के साथ फोटो प्रकाशित कर उनकी दास्तां जनता, प्रशासन और सरकार तक पहुंचाने वाले मित्र के लिए उनके बोले थे - थैंक्यू अमर उजाला।

अमर उजाला रहा सबसे आगे
छात्राओं के इस संघर्ष को अमर उजाला ने पहले ही दिन से ही प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके लिए अमर उजाला में अब राजगढ़ की बेटियों ने स्कूल पर जड़ा ताला, रविवार को भी धरना जारी दो की तबीयत बिगड़ी, स्कूल अपग्रेडेशन के लिए गेट पर जमीं रही बेटियां, राजगढ़ में आंदोलन के साथ होता रहा दाखिला, स्कूल अपग्रेड कराने के लिए भूख हड़ताल करेंगी बेटियां, मंजूरी का इंतजार, स्कूल अपग्रेड होने पर ही होगा धरना समाप्त, बिजली-पानी काटने की धमकी के बाद भी डटीं रहीं बेटियां, राजगढ़ की बेटियां बोली, धमकी से नहीं डरेंगी, धरने पर बैठी बेटियों को धमकाने वालों पर हो कार्रवाई, लेटर का इंतजार, राजगढ़ की बेटियां आज करेंगी राज्यमंत्री का घेराव और राजगढ़ का स्कूल अपग्रेड: बेटियां बोली लेटर चाहिए शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।
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मेरे पास कहने को शब्द नहीं है। बहुत अच्छा लग रहा है। सरकार ने देर से ही हमारी मांग सुन तो ली। सभी को धन्यवाद खासतौर पर अमर उजाला को जिसमें प्रतिदिन हमारी खबरें आती रहीं। -कमलेश

जिस मांग की खातिर हमने धरना शुरू किया था। वह मांग आज पूरी हो गई। पूरे गांव ने हमारा साथ दिया। सभी लोग 13 दिन तक धरने पर डटे रहे। आज इसी का परिणाम है कि हमारा स्कूल अपग्रेड हो गया। -पिंकी

हम धरने पर अपनी मर्जी से बैठे थे। हमारा मकसद सिर्फ स्कूल अपग्रेड करना था। हम कई साल से सरकार के आश्वासन सुन-सुनकर निराश हो गए थे। फिर लगा कि इस बार तो आंदोलन करना ही पड़ेगा। हर कदम पर साथ देने पर थैंक्यू अमर उजाला- जागृति

हमने स्कूल अपग्रेड कराने के लिए आंदोलन तो शुरू कर दिया। लेकिन बीच में सरकार की ओर से किसी स्कूल को अपग्रेड नहीं करने के बयान पर बहुत निराश हुई। हिम्मत नहीं हारी, इसी का परिणाम है कि आज हमारी जीत हुई है। - पूनम

हमने तो आंदोलन स्कूल अपग्रेड कराने की खातिर शुरू किया था। 13 दिन तक घोर तपस्या की। घरवाले भी धरने पर हमारे साथ ही बैठे रहे। आज हमारी मेहनत सफल हो गई। अब हमें आगे की पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। -मंजू

हमने आंदोलन बड़ा सोच समझकर शुरू किया था। हमारा स्कूल जाना रोज का काम था। लेकिन रास्ते में बहुत परेशानी होती थी। कई बार तो बस में चढ़ने की जगह भी नहीं मिलती थी। लेकिन अब गांव का ही स्कूल अपग्रेड होने से सारी परेशानी समाप्त हो गई। -प्रीति

हमारा स्कूल अपग्रेड हो गया है। इस बार तो यहां हमारी बड़ी बहन 12वीं तक पढ़ेंगी। फिर हम भी यहीं पर 12वीं तक शिक्षा ग्रहण करेंगी। नहीं तो हमें भी औरों की तरह पढ़ाई छोड़ घर पर ही बैठना पड़ता। हमारी इस मुुहिम का हिस्सा बनने के लिए अमर उजाला का धन्यवाद। -रिंकी

आज यह स्कूल अपग्रेड हो गया। बहुत अच्छी बात है। हमने तो पहले ही कह दिया था कि स्कूल अपग्रेड होने का लेटर आने के बाद ही धरना छोड़ेंगी। अब जाकर हमारी मांग पूरी हो गई। देर से ही सही लेकिन हमारी जीत हुई। -ऊषा शर्मा

बहुत अधिक खुशी हो रही है। कई सालों से इस स्कूल के अपग्रेड होने का इंतजार था। जितनी मेहनत हमने यहां कि उतनी ही अमर उजाला ने भी अपनी खबरों के माध्यम से की। थैंक्यू अमर उजाला, हमारी आवाज को उठाने के लिए। -नेहा

हमारे गांव में लड़कियां दसवीं के बाद पढ़ती ही नहीं थी। मां-बाप भी बेटियों को बाहर पढ़ाने से परहेज करते थे। अब हमारे गांव का स्कूल अपग्रेड हो गया है। हम सभी 12वीं तक यहीं पर ही पढ़ेंगी। -ऊषा कुमारी

हमें यहां बैठे हुए 13 दिन हो चुके थे, आखिर सरकार ने हमारी सुन तो ली। हमने तो एक बार उम्मीद ही खो दी थी। सभी नेता अपनी-अपनी राजनीति चमका रहे थे। कोई सच्ची बात नहीं कर रहा था। अब हमें आगे की पढ़ाई करने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। - कौश्लया

स्कूल अपग्रेड होने की खबर से बहुत खुशी हो रही है। लेकिन लेटर आने के बाद ही हमने इसे माना है। आज हमारी मेहनत पूरे गांव के काम आ गई। हमारी खुशी की कोई सीमा नहीं है, हमारी जीत में हमारी आवाज अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए अमर उजाला का धन्यवाद करते हैं। -कोमल

जब मैं पहली कक्षा में थी तब से सुनती आ रही हूं कि यह स्कूल 12वीं तक अपग्रेड हो रहा है। 12 साल हो गए। लेकिन यह स्कूल अपग्रेड नहीं हुआ। अब जाकर यह अपग्रेड हुआ है। चलो देर से ही सही स्कूल अपग्रेड हो ही गया। हमारा साथ देने के लिए सभी का तहेदिल से सुक्रिया। -महक

हमारे घर वाले हमें पढ़ने के लिए बाहर जाने से मना करते थे। लेकिन अब तो हम इसी गांव में रहकर पढ़ेंगी। हमारी मेहनत सफल हो गई। अमर उजाला ने भी हमारी खबरों के माध्यम से बहुत मदद की, इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। -अंजलि

मेरी बड़ी बहन जब स्कूल अपग्रेड कराने की मांग को लेकर धरनेे पर बैठी तो मैं भी यहीं बैठ गई। मैंने तो उसी दिन सोच लिया था कि अब तो उसी दिन उठूंगी जब स्कूल 12वीं का हो जाएगा, ताकि मुझे आगे पढ़ने में परेशानी न हो। -सिमरन

हमें बहुत खुशी हो रही है कि हमारा स्कूल अपग्रेड हो गया। हमारे माता-पिता भी यह समाचार सुनकर बहुत खुश हुए। आखिर आज हमारी मेहनत कामयाब हो गई। 13 दिनों तक धरना प्रदर्शन में हमारे साथ देने के लिए अमर उजाला और ग्रामीणों समेत सभी का शुक्रिया। -काजल

भाई भी बैठे थे धरने पर

मेरी बहन के साथ मैं भी 13 दिन से यहीं धरने पर बैठा था। आज सुबह जब अमर उजाला में हमारे स्कूल के अपग्रेड होने का समाचार सुना तो बहुत खुशी हुई। अब मेरी बहन को पढ़ने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा, जिस मजबूरी के कारण गांव के लड़कियों की पढ़ाई छूटती थी उसका समाधान हो गया है। -दिनेश

 मुझे सभी कहते थे कि धरने पर लड़कियां ही बैठेंगी। लेकिन मैंने किसी की नहीं सुनीं। मैं भी अपनी बहनों के साथ धरने पर बैठ गया। आखिकर 13वें दिन जाकर हमारी मेहनत सफल हो गई। स्कूल अपग्रेड करवाने की इस मुहिम में अमर उजाला ने भी पूरा सहयोग दिया, इसके लिए हम अमर उजाला का धन्यवाद करते हैं। -जतिन

हमारी बहनों को 10वीं के बाद पढ़ाई के लिए बाहर जाने से घरवाले रोकते थे। लेकिन अब इन्हें कोई नहीं रोकेगा। अब सभी बहनें 12वीं तक इसी गांव में पढ़ेंगी। स्कूल अपग्रेड होने से पूरे गांव में खुशी का माहौल है। लड़कियों की पढ़ाई बीच में नहीं छूटेगी। -हिमांशु

आज अमर उजाला में स्कूल अपग्रेड होने की खबर सुनकर बहुत खुशी हुई। अब तो हमसे बड़े 12वीं तक यहीं पढ़ेंगे। फिर हम भी यहीं पर शिक्षा लेंगे। पूरा गांव खुश है। पूरा गांव 13 दिन तक धरना पर डटा रहा। इस जीत के लिए हम सभी का धन्यवाद करते हैं। -शुभम

यह बोलीं माताएं
हमें बेटियों के लिए यहां बैठे 13 दिन हो गए। बहुत खुशी हो रही है कि हमारा स्कूल 12वीं तक हो गया है। हमारी बेटियों को पढ़ाई के लिए 13 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। अब न तो उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ेगी और न ही दूसरे गांव पढ़ने जाना पड़ेगा, जिससे बेटी की सुरक्षा को लेकर चिंता खत्म हो गई। हमारी इस मुहिम का हिस्सा बनने के लिए अमर उजाला का धन्यवाद करते हैं। -ललिता

हमारी बेटियों की मांग को आखिरकार सरकार ने मांग ही ली। स्कूल अपग्रेड होने से हम बहुत खुश हैं। गांव में एक बस थी। अगर वह भी निकल जाती तो बड़ी चिंता होती थी। बेटी अब घर कैसी आएगी। लेकिन अब कोई परेशानी नहीं रहेगी और न ही बेटियों को मजबूरन पढ़ाई छोड़नी पड़ेंगी। -प्रेम

मेरे चार पौत्री हैं, सभी को 10वीं कक्षा तक पढ़ाकर मजबूरन घर बैठाना पड़ा, क्योंकि माहौल खराब था। आज हमें खुशी हो रही है कि गांव में ही स्कूल 12 तक अपग्रेड हो गया है। अब हमारी बेटियां गांव में ही पढ़ेंगी और अभिभावकों को नाम रोशन करेंगी। -राजवंती

मेरी चार में से तीन लड़कियों ने 10वीं तक की पढ़ाई की। तीनों आगे स्कूल नहीं होने के कारण घर पर ही रही। बाहर पढ़ाने में बड़ा डर लगता था। लेकिन अब सारी समस्याएं दूर हो गई। -संतोष
मेरे एक ही लड़की है। उसे 10वीं तक पढ़ाई कराकर उसकी शादी कर दी। आगे स्कूल तो था नहीं, लेकिन अब मेरी पोती 12वीं तक इसी स्कूल में पढ़ेगी। बहुत खुशी हो रही है कि हमारे गांव का स्कूल अपग्रेड हो गया है। इसके लिए हम अमर उजाला सहित सभी का धन्यवाद करते हैं। -लक्ष्मी

बेटियों को आगे की शिक्षा दिलाने के लिए चली इस मुहिम में मैं 13 दिन से यहीं धरने पर बैठी थी। दिन में गर्मी और रात की बारिश भी हमें यहां से हटा नहीं सकी। आज जाकर खुशी मिली है। हमारा स्कूल अब 12वीं तक हो गया है। -संतोष देवी

हमने स्कूल अपग्रेड होने की जानकारी तो कल ही मिल गई थी, लेकिन हमें इंतजार लेटर था। उसके बिना हम नहीं मानती। लेकिन अब वह लेटर मिल गया है। पूरे गांव में खुशी का माहौल है कि हमारा स्कूल अपग्रेड हो गया है, अब बेटियों को बाहर पढ़ने नहीं जाना पड़ेगा। -भतेरी

हमारे जमाने में लड़की 10वीं पास कर लेती थी तो बहुत पढ़ी-लिखी मानी जाती थी। लेकिन अब 10वीं तक पढ़ी को कोई नहीं पूछता। हमें तो हमारे मां-बाप ने ब्याह कर दिए, लेकिन अब हमारी बहन और भतीजी गांव में ही 12वीं तक पढ़ेंगी। -आशा

हमने हमारी बेटियों के लिए जो आंदोलन छेड़ा था आज वह कामयाब हो गया। सरकार ने देर से ही सुनी लेकिन हमारी सुनी तो सही। मैं प्रतिदिन अमर उजाला पढ़ती हूं। इस मुहिम में साथ देने के लिए अमर उजाला का विशेष धन्यवाद करती हूं। -अनीता

मैं 65 साल की बूढ़ी औरत यहां मौसम में भी बेटियों के लिए बैठी रहीं। सरकार ने तो एक बार स्कूल अपग्रेड करने से इनकार कर दिया। लेकिन हमने भी हिम्मत नहीं हारी और स्कूल अपग्रेड कराकर ही दम लिया। अब बेटियों को बाहर पढ़ने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। -मैमवती


ग्रामीण भी बोले अमर उजाला जैसा कोई नहीं
हमारी मांग सरकार ने मान ली है। स्कूल अपग्रेड हो गया है। अमर उजाला ने हर कदम पर हमारा साथ दिया, प्रतिदिन अच्छी खबरें प्रकाशित कर सरकार का इस ओर ध्यान झुकाया। स्कूल अपग्रेड होने पर बहुत खुशी हो रही है। -हरीसिंह

स्कूल अपग्रेड कराने की हमारी बहुत पुरानी मांग थी। इसके लिए हमने बहुत लंबा संघर्ष किया है। अब जाकर यह पूरी हुई है। बेटियों को अब पढ़ने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। संघर्ष में साथ देने वालों को तहेदिल से हम धन्यवाद करते हैं। -कृष्ण सिंह, पूर्व सरपंच

गर्मी और बरसात के बीच भी हम बेटियों के साथ यही टिके रहे। हमें हर सूरत में स्कूल अपग्रेड कराना था। अब जाकर हमारी मांग पूरी हो गई है। अब बेटियों को मजबूरन पढ़ाई नहीं छोड़नी पड़ेगी। इस आंदोलन का हिस्सा बने लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद। -विजय

पिछले छह-सात साल से स्कूल अपग्रेड कराने की मांग उठा रहे थे। शिक्षामंत्री से मिलने के बाद भी हमें केवल आश्वासन ही मिलते रहे। इसी के बाद हमने यह आंदोलन छेड़ा। संघर्ष किया तो आखिरकार जीत मिली, अब 12वीं तक बेटियां गांव में ही पढे़ंगी। -कैप्टन बाबूसिंह

स्कूल अपग्रेड होने के बाद अब खुशी जताने के लिए शब्द नहीं है। सभी ने इसके लिए बहुत मेहनत की। अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक के चक्कर लगाए। आखिरकार हमारी जीत हुई अब बेटियों को बाहर पढ़ने के लिए नहीं जाना पड़ेगा। -अजीत सिंह

आखिर बेटियों के आगे सरकार को झुकना ही पड़ा। 13 दिन का यह संघर्ष बहुत कड़ा रहा। लेकिन हमारी जीत हो गई। अब बेटियों को 12वीं तक पढ़ाई के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। हमारे संघर्ष का हिस्सा बनने के लिए अमर उजाला का स्पेशली थैंक्स। -रणजीत सिंह

हमें विश्वास था कि हमारी मांग जरूरपूरी होगी। इसी विश्वास के साथ हम बेटियों के साथ यहां पर बैठे थे। आज हमारी मांग पूरी हो गई। बहुत खुशी हो रही है। स्कूल अपग्रेड होने के कारण मां-बाप की कई समस्याओं को हल हो गया है। साथ देने के लिए सभी का धन्यवाद। - संजय

स्कूल अपग्रेड कराने का कई बार आश्वासन मिला। घोषणाएं भी हुई। लेकिन हुआ नहीं। अब लेटर देखकर यकीन हुआ कि हमारा स्कूल अपग्रेड हो गया है। विश्वास की जीत हुई। अब गांव की बेटियां गांव में ही पढे़ंगी और माता-पिता का नाम रोशन करेंगी। -बालू सिंह

गांव की बेटियां संघर्ष में बहुत आगे रही। आसपास के गांव के लोग भी बेटियों के संघर्ष की दाद देेते हैं। हम बेहद खुश है। बेटियों को पढ़ने के लिए अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा। स्कूल अपग्रेड होने की पूरे गांव को खुशी है। हम अमर उजाला समेत सभी का धन्यवाद करते हैं जिन्होंने हमारे इस संघर्ष में साथ दिया। -मंगू सिंह

13 दिन के लंबे संघर्ष के बाद आखिर हमारी बेटियां जीत ही गईं। इनके मजबूत इरादों के आगे आखिर सरकार को झुकना ही पड़ा। अब बेटियों की पढ़ाई नहीं रुकेगी। स्कूल अपग्रेड होने से गांव की बेटियों को बाहर नहीं जाना पड़ेगा। इस संघर्ष में साथ देने के लिए हम सभी लोगों का धन्यवाद करते हैं।-
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गोवर्धन सिंह, सरपंच
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