रेवाड़ी। रेवाड़ी रेलवे स्टेशन को पर्यावरण अनुकूल और ऊर्जा दक्ष बनाने की दिशा में ग्रीन मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए आईजीबीसी (इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल) ने ग्रीन रेटिंग की सुविधा एवं प्रमाणन कार्य के लिए 56.48 लाख रुपये का टेंडर जारी किया है।
टेंडर में अलवर रेलवे स्टेशन का भी कार्य शामिल है। खास बात ये है कि ग्रीन रेटिंग दिलाने को लेकर पहली बार ये कार्य होगा। निविदा के अनुसार पहला कार्य एनएस-1 श्रेणी के अंतर्गत रेवाड़ी स्टेशन (एनएसजी 3) के लिए है जबकि दूसरा कार्य एनएस-2 के अंतर्गत अलवर स्टेशन के लिए निर्धारित किया गया है।
दोनों स्टेशनों को ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुरूप विकसित कर उनका मूल्यांकन कराया जाएगा और प्रमाणन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। रेलवे प्रशासन का उद्देश्य इन स्टेशन को पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप विकसित करना है ताकि ऊर्जा की बचत, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और हरित क्षेत्र के विकास जैसे पहलुओं को बढ़ावा दिया जा सके।
इसके तहत स्टेशन परिसर में ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग, वर्षा जल संचयन, सौर ऊर्जा का प्रयोग, बेहतर वेंटिलेशन और प्राकृतिक प्रकाश की व्यवस्था की जाएगी।
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आईजीबीसी की गाइडलाइन के अनुसार होगा कार्य
यह परियोजना इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (आईजीबीसी) की गाइडलाइन के अनुसार पूरी की जाएगी। आईजीबीसी देशभर में भवनों और सार्वजनिक परिसरों को ग्रीन रेटिंग प्रदान करता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा मिलता है। रेलवे स्टेशनों को ग्रीन सर्टिफिकेशन मिलने से न केवल पर्यावरणीय प्रभाव कम होगा बल्कि यात्रियों को भी स्वच्छ और बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
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संसाधनों के बेहतर उपयोग को मिलेगा बढ़ावा
रेलवे अधिकारियों के अनुसार ग्रीन सर्टिफिकेशन मिलने से स्टेशन की पर्यावरणीय छवि मजबूत होगी और संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। इससे बिजली और पानी की खपत में कमी आएगी तथा कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी। रेलवे का लक्ष्य है कि भविष्य में अन्य स्टेशनों को भी इसी प्रकार ग्रीन रेटिंग दिलाई जाए ताकि भारतीय रेल का बुनियादी ढांचा अधिक पर्यावरण हितैषी बन सके।
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पुराने रेलवे स्टेशनों में से एक है रेवाड़ी
रेवाड़ी रेलवे स्टेशन प्रमुख जंक्शन है। यहां से 6 रेल लाइनें निकलती हैं। मौजूदा समय में 32 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत स्टेशन का कायाकल्प का कार्य किया जा रहा है। यहां से प्रतिदिन 100 से अधिक ट्रेनों का परिचालन होता है। 1873 में स्थापित स्टेशन यह हरियाणा के सबसे पुराने रेलवे स्टेशनों में से एक है।
इन बातों का होगा मूल्यांकन
ऊर्जा दक्षता : बिजली की बचत, एलईडी लाइट्स, सोलर पैनल का उपयोग।
जल संरक्षण : वर्षा जल संचयन, पानी की बचत की तकनीक।
कचरा प्रबंधन : ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक निस्तारण, प्लास्टिक कम करना।
प्राकृतिक रोशनी और वेंटिलेशन : कम बिजली खपत के लिए प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग।
हरित क्षेत्र : पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण उपाय।
कार्बन फुटप्रिंट में कमी : प्रदूषण और ऊर्जा खपत घटाने के प्रयास।
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वर्जन :
रेवाड़ी रेलवे स्टेशन को पर्यावरण अनुकूल और ऊर्जा दक्ष बनाने की दिशा में ग्रीन मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। ग्रीन रेटिंग दिलाने को लेकर पहली बार ये कार्य रेवाड़ी के लिए होगा। योजना के अनुसार ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुरूप विकसित कर उनका मूल्यांकन कराया जाएगा और प्रमाणन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।-पूजा मित्तल, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, जयपुर।